कोलकाता:पश्चिम बंगाल में चल रही Special Intensive Revision (SIR) प्रक्रिया को लेकर सियासी तापमान बढ़ गया है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी ने भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पत्र लिखकर अहम मांग उठाई है। उन्होंने चुनाव आयोग से आग्रह किया है कि चाय बागान और सिनकोना (Cinchona) बागानों के रोजगार रिकॉर्ड को मतदाता सूची संशोधन के लिए पहचान और निवास के वैध दस्तावेज के रूप में मान्यता दी जाए।
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किन लोगों के लिए उठाई गई मांग?
सुवेंदु अधिकारी ने अपने पत्र में खासतौर पर उत्तर बंगाल केचाय बागान मजदूरोंवनवासी समुदायोंप्लांटेशन वर्कर्सका जिक्र किया है। ये समुदाय दार्जिलिंग, कालिम्पोंग, जलपाईगुड़ी, कूचबिहार, अलीपुरद्वार और उत्तर-दक्षिण दिनाजपुर जिलों में बड़ी संख्या में रहते हैं।
लोकतांत्रिक अधिकारों का मुद्दा
सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि दस्तावेजों की कमी के कारण इन समुदायों के हजारों पात्र मतदाताओं के नाम वर्षों से वोटर लिस्ट से कटे हुए हैं, जिससे उन्हें मतदान के अधिकार से वंचित होना पड़ रहा है।उन्होंने इसे लोकतंत्र और समान अधिकारों के खिलाफ बताया।
पहले भी उठ चुकी है मांग
पत्र में यह भी उल्लेख है कि इससे पहले दार्जिलिंग के सांसद राजू बिष्टा भी इसी तरह की मांग कर चुके हैं। उनका कहना था कि वर्ष 2002 से पहले के रोजगार रिकॉर्ड को भी मान्यता मिलनी चाहिए।
SIR प्रक्रिया पर सियासी बहस
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि मौजूदा SIR प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची को शुद्ध करना है, लेकिन यदि लचीली दस्तावेज नीति नहीं अपनाई गई तो बड़ी आबादी मतदान से बाहर हो सकती है।
चुनाव आयोग का रुख अहम
अब सबकी नजरें चुनाव आयोग के फैसले पर टिकी हैं। यदि यह मांग स्वीकार होती है, तो लाखों मजदूरों और वनवासियों को मतदाता सूची में शामिल होने का रास्ता मिल सकता है।
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