खुर्जा/बुलंदशहर। श्री 1008 महामंडलेश्वर निखिलेश्वरानंद जी महाराज ने संत रामपाल के कथित बयानों और गतिविधियों पर कड़ी आपत्ति जताते हुए उन्हें सनातन धर्म की भावनाओं के विरुद्ध बताया। उन्होंने कहा कि यदि किसी भी व्यक्ति द्वारा धार्मिक आस्थाओं पर आपत्तिजनक टिप्पणी की जाती है, तो उसका समाज में विरोध होना स्वाभाविक है।
महामंडलेश्वर निखिलेश्वरानंद जी महाराज ने अपने वक्तव्य में सनातन धर्म के अनुयायियों से अपील की कि वे धर्म के प्रति सम्मान बनाए रखें तथा ऐसे व्यक्तियों या विचारों का शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करें, जिन्हें वे धर्मविरोधी मानते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि संत कबीर दास ने स्वयं को कभी भगवान नहीं कहा, बल्कि ईश्वर का सेवक और दास बताया। उनके अनुसार संतों का जीवन विनम्रता, सेवा और मानव कल्याण का संदेश देता है तथा प्रत्येक व्यक्ति को काम, क्रोध, लोभ और मोह जैसे विकारों से दूर रहना चाहिए।
महामंडलेश्वर ने सनातन धर्म के मूल सिद्धांत “सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः, सर्वे भद्राणि पश्यन्तु, मा कश्चिद् दुःखभाग्भवेत्” का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति का आधार सभी के कल्याण और आपसी सद्भाव में निहित है।
उन्होंने समाज से धार्मिक मर्यादा बनाए रखने और किसी भी प्रकार के विवाद का समाधान कानून एवं संविधान के दायरे में रहकर करने की अपील की।
नोट: यह समाचार श्री 1008 महामंडलेश्वर निखिलेश्वरानंद जी महाराज द्वारा दिए गए वक्तव्य पर आधारित है। इसमें व्यक्त विचार उनके निजी बयान हैं। संबंधित पक्ष का पक्ष उपलब्ध होने पर उसे भी प्रकाशित किया जाएगा।
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