लोन रिकवरी के नाम पर फाइनेंस कंपनियों की ‘गुंडागर्दी’ पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा चाबुक!
”कर्ज (Loan) एक देनदारी पैदा करता है और बैंक को बकाया वसूलने का अधिकार देता है; लेकिन जिस तरीके से उस अधिकार का प्रयोग किया जाता है, वह कानून के दायरे में होना चाहिए!” — सुप्रीम कोर्ट
अगर आपने या आपके किसी परिचित ने लोन पर गाड़ी, ट्रक या कोई वाहन लिया है, तो देश की सबसे बड़ी अदालत का यह ऐतिहासिक फैसला आपके लिए जानना बेहद जरूरी है! 👇
🚛 मामला क्या था?
उत्तर प्रदेश के हरि दत्ता शर्मा जी ने अपने आजीविका के साधन — Tata SFC 407 ट्रक के लिए ‘चोलामंडलम इन्वेस्टमेंट एंड फाइनेंस कंपनी’ से लोन लिया था। किश्तें बकाया होने पर 9 अप्रैल 2023 की रात को 1:00 बजे रिकवरी एजेंटों ने बिना किसी लिखित पूर्व नोटिस के, गाड़ी के स्टीयरिंग का ताला तोड़ा और उसे जबरन उठाकर ले गए। बाद में वाहन को चुपके से नीलाम कर दिया गया।
जब पीड़ित ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, तो उनकी याचिका खारिज हो गई। लेकिन जब मामला सुप्रीम कोर्ट (Hari Dutta Sharma vs State of U.P. & Ors., 2026 INSC 998) पहुंचा, तो जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने फाइनेंस कंपनी की इस मनमानी पर ऐतिहासिक फैसला सुनाया! 🔥
⚖️ सुप्रीम कोर्ट के 5 कड़े संदेश व आदेश:
1️⃣ गुंडागर्दी और बलप्रयोग अवैध: लोन डिफॉल्ट होने का मतलब यह नहीं कि फाइनेंस कंपनी या बैंक ‘बाहुबल’ या गुंडों के जरिए संपत्ति छीन लें। रिकवरी केवल कानूनी प्रक्रिया और RBI गाइडलाइंस के तहत ही हो सकती है।
2️⃣ RBI नियमों और नोटिस का उल्लंघन: समझौते के तहत उचित (7 दिन) पूर्व नोटिस दिए बिना या रात के अंधेरे में जबरन जब्ती पूरी तरह गैर-कानूनी है।
3️⃣ मौलिक अधिकारों (Article 14 & 21) का हनन: गैर-कानूनी तरीके से आजीविका का साधन छीनना संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 (रोजगार और जीवन के अधिकार) का उल्लंघन है।
4️⃣ ₹10 लाख का भारी मुआवजा: सुप्रीम कोर्ट ने फाइनेंस कंपनी को आदेश दिया कि वह मानसिक उत्पीड़न और आजीविका के नुकसान के लिए पीड़ित को ₹10,00,000 (दस लाख रुपये) का मुआवजा दे! 💰
5️⃣ पूरा पैसा ब्याज सहित वापस: नीलाम की गई गाड़ी की बिक्री राशि (₹4,50,000) को 6% ब्याज के साथ लौटाने और पीड़ित के दोनों लोन अकाउंट तुरंत बंद (Close) करने के निर्देश दिए गए।
📢 हर नागरिक और वाहन मालिक के कानूनी अधिकार:
👉 समय सीमा: रिकवरी एजेंट असमय (बेवक्त/रात में) आपके घर या कार्यस्थल पर दबंगई नहीं कर सकते।
👉 लिखित नोटिस अनिवार्य: वाहन जब्त करने से पहले नियमानुसार लिखित नोटिस देना अनिवार्य है।
👉 मानसिक प्रताड़ना पर रोक: कोई भी बैंक या NBFC धमकी या मानसिक प्रताड़ना नहीं दे सकती।
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GB NEWS INDIA | Category: Government Policy

