खुर्जा (बुलंदशहर)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की खुर्जा नगर इकाई की ओर से प्रत्येक वर्ष की तरह इस वर्ष भी अखंड भारत संकल्प दिवस उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया गया। नगर के विभिन्न प्रमुख स्थानों पर आयोजित कार्यक्रमों में स्वयंसेवकों, विद्यार्थियों, स्थानीय नागरिकों और समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों ने सहभागिता की।
कार्यक्रम का आयोजन सरस्वती विद्या मंदिर, आदर्श शिशु मंदिर, रामामूर्ति स्कूल, एस.एम.जे. इंटर कॉलेज तथा महर्षि वाल्मीकि चौक सहित पांच प्रमुख स्थानों पर किया गया। सभी स्थानों पर स्वयंसेवकों और नागरिकों की मौजूदगी में राष्ट्र की एकता, अखंडता और सांस्कृतिक विरासत को लेकर विचार रखे गए।
विभाजन की पीड़ा और राष्ट्र एकता पर दिया जोर
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बुलंदशहर विभाग के विभाग सेवा प्रमुख सरवचन जी ने भारत विभाजन की ऐतिहासिक घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि अखंड भारत का विचार सांस्कृतिक एकता और साझा विरासत से जुड़ा हुआ है। उन्होंने राष्ट्र की एकता और सामाजिक समरसता को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
उन्होंने अपने संबोधन में विभाजन के दौरान सत्ता और राजनीतिक परिस्थितियों को लेकर भी तीखी टिप्पणी की। उनके वक्तव्य में विभाजन को भारत के लिए गंभीर ऐतिहासिक त्रासदी बताते हुए राष्ट्र की एकता को सर्वोपरि रखने का आह्वान किया गया।
अखंड भारत केवल संकल्प नहीं, सांस्कृतिक एकता का विचार: नगर कार्यवाह
खुर्जा नगर कार्यवाह सुदर्शन जी ने अखंड भारत संकल्प दिवस पर विस्तृत बौद्धिक प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि संघ द्वारा प्रत्येक वर्ष लिया जाने वाला अखंड भारत का संकल्प केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि राष्ट्र की सांस्कृतिक एकता, ऐतिहासिक विरासत और भावी पीढ़ियों के प्रति जिम्मेदारी का प्रतीक है।
उन्होंने कहा कि भारतीय सभ्यता और संस्कृति का प्रभाव ऐतिहासिक रूप से वर्तमान राजनीतिक सीमाओं से कहीं व्यापक रहा है। उनके अनुसार अखंड भारत की अवधारणा को संघ राजनीतिक विस्तार के बजाय सांस्कृतिक एकता, राष्ट्रभाव और ऐतिहासिक चेतना से जोड़कर देखता है।
विभाजन के दौरान सेवा कार्यों का किया उल्लेख
कार्यक्रम में वक्ताओं ने 1947 के भारत विभाजन के दौरान स्वयंसेवकों द्वारा किए गए राहत और सेवा कार्यों का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि उस दौर में स्वयंसेवकों ने प्रभावित लोगों के बीच भोजन, वस्त्र, चिकित्सा सहायता, सुरक्षा और पुनर्वास से जुड़े कार्यों में सहयोग किया।
वक्ताओं ने कहा कि संघ राष्ट्र की एकता और अखंडता को लेकर लगातार सामाजिक एवं सांस्कृतिक जागरण के कार्यों पर जोर देता रहा है।
अखंड भारत की अवधारणा पर चर्चा
कार्यक्रम के दौरान अखंड भारत की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक अवधारणा पर भी चर्चा हुई। वक्ताओं के अनुसार इस विचार में वर्तमान भारत के साथ उन क्षेत्रों को भी सांस्कृतिक संदर्भ में देखा जाता है, जिनका भारतीय सभ्यता, इतिहास और परंपराओं से ऐतिहासिक जुड़ाव रहा है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि कार्यक्रम में व्यक्त अखंड भारत की अवधारणा को सांस्कृतिक एकता, ऐतिहासिक विरासत और राष्ट्रभाव के संदर्भ में प्रस्तुत किया गया।
देशभक्ति गीत और संघ प्रार्थना से गूंजा परिसर
कार्यक्रम के दौरान सभी स्वयंसेवकों ने अखंड भारत के संकल्प को दोहराया और राष्ट्र की एकता, अखंडता, सांस्कृतिक गौरव तथा मातृभूमि की सेवा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की। इस दौरान देशभक्ति गीत, राष्ट्रगान और संघ प्रार्थना का भी गायन हुआ।
नगर के विभिन्न स्थानों पर आयोजित कार्यक्रम शांतिपूर्ण, अनुशासित और गरिमापूर्ण वातावरण में संपन्न हुए। कार्यक्रम के समापन पर उपस्थित लोगों ने राष्ट्र की एकता और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के संकल्प को दोहराया।
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