बुलंदशहर। अपराध विवेचना को अधिक वैज्ञानिक, प्रभावी और साक्ष्य आधारित बनाने के उद्देश्य से भारतीय न्याय संहिता-2023 (BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता-2023 (BNSS) एवं भारतीय साक्ष्य अधिनियम-2023 (BSA) के नवीन प्रावधानों तथा फॉरेंसिक साक्ष्यों के प्रभावी उपयोग को लेकर दिल्ली पब्लिक स्कूल (DPS), बुलंदशहर में कार्यशाला का आयोजन किया गया।
कार्यशाला का शुभारंभ वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री दिनेश कुमार सिंह ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस दौरान अपर पुलिस अधीक्षक अपराध श्री नरेश कुमार सिंह सहित पुलिस विभाग के अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे।
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नए आपराधिक कानूनों की दी गई जानकारी
कार्यशाला में पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को BNS, BNSS और BSA के अंतर्गत लागू नवीन प्रावधानों की जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने अपराधों की विवेचना के दौरान नए कानूनों के प्रावधानों को प्रभावी ढंग से लागू करने, साक्ष्यों के संरक्षण और वैज्ञानिक तरीकों के इस्तेमाल से संबंधित महत्वपूर्ण बिंदुओं पर जानकारी साझा की।
अधिकारियों एवं पुलिसकर्मियों को विशेष रूप से घटनास्थल का निरीक्षण, वैज्ञानिक साक्ष्य एवं प्रदर्श का संकलन, साक्ष्यों की पैकेजिंग और प्रेषण तथा फॉरेंसिक विज्ञान के प्रभावी इस्तेमाल के संबंध में व्यावहारिक एवं तकनीकी जानकारी प्रदान की गई।
फॉरेंसिक विशेषज्ञों ने साझा किया तकनीकी ज्ञान
कार्यशाला में विधि विज्ञान प्रयोगशाला उत्तर प्रदेश के विशेषज्ञों ने विभिन्न विषयों पर व्याख्यान दिए। इनमें प्रोफेसर डॉ. आदर्श कुमार, निदेशक विधि विज्ञान प्रयोगशाला उत्तर प्रदेश, डॉ. अजय कुमार, उपनिदेशक विधि विज्ञान प्रयोगशाला अलीगढ़, डॉ. पूजा रस्तोगी, प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष फॉरेंसिक मेडिसिन एंड टॉक्सिकोलॉजी तथा डॉ. उदय प्रताप सिंह, वैज्ञानिक विधि विज्ञान प्रयोगशाला लखनऊ शामिल रहे।
विशेषज्ञों ने अपराध की विवेचना में वैज्ञानिक एवं फॉरेंसिक साक्ष्यों की भूमिका, घटनास्थल से साक्ष्य एकत्र करने की सही प्रक्रिया और उनके सुरक्षित रखरखाव से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं पर पुलिसकर्मियों को जानकारी दी।
वैज्ञानिक साक्ष्यों के इस्तेमाल पर विशेष जोर
कार्यशाला के दौरान इस बात पर जोर दिया गया कि किसी अपराध की विवेचना में घटनास्थल से प्राप्त साक्ष्यों को वैज्ञानिक तरीके से संरक्षित एवं संकलित करना बेहद महत्वपूर्ण है। साक्ष्यों की सही पैकेजिंग, लेबलिंग और समयबद्ध तरीके से संबंधित फॉरेंसिक प्रयोगशाला तक प्रेषण की प्रक्रिया के बारे में भी पुलिसकर्मियों को व्यावहारिक जानकारी दी गई।
कार्यशाला का उद्देश्य पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों को नए आपराधिक कानूनों के अनुरूप विवेचना की प्रक्रिया से परिचित कराने के साथ-साथ आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों और फॉरेंसिक साक्ष्यों का अधिक प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करना रहा।
इस प्रशिक्षण से पुलिसकर्मियों को अपराध विवेचना के दौरान वैज्ञानिक साक्ष्यों को बेहतर तरीके से समझने और उनका उपयोग करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
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