नई दिल्ली: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने भारतीय सेना की संरचना को लेकर एक बयान दिया है, जिस पर सियासी बहस शुरू हो गई है। उन्होंने मंगलवार को कहा कि भारतीय सेना में सैनिकों की संख्या अधिक है और भविष्य के युद्धों की प्रकृति को देखते हुए इस पर पुनर्विचार की जरूरत है।

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पृथ्वीराज चव्हाण ने सुझाव दिया कि सैनिकों को अन्य उत्पादक और रणनीतिक कार्यों में लगाया जा सकता है। उनका कहना था कि बदलते वैश्विक हालात में युद्ध की रणनीति भी बदल रही है।

‘भविष्य के युद्ध हवाई शक्ति और मिसाइलों पर निर्भर होंगे’

अपने बयान में चव्हाण ने कहा कि हालिया सैन्य अभियानों से यह स्पष्ट होता है कि

“भविष्य के संघर्ष काफी हद तक हवाई ताकत और मिसाइल तकनीक के जरिए लड़े जाएंगे।”

उन्होंने यह भी कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने आधुनिक युद्ध की दिशा को उजागर किया है और पारंपरिक युद्ध संरचना पर पुनर्विचार की आवश्यकता को रेखांकित किया है।

ऑपरेशन सिंदूर को लेकर दिया विवादित बयान

पृथ्वीराज चव्हाण ने अपने बयान में यह भी कहा कि

“भारत ऑपरेशन सिंदूर के पहले ही दिन हार गया था।”

इस टिप्पणी के बाद राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इसे सेना के मनोबल पर सवाल उठाने वाला बयान बताया है, जबकि कांग्रेस समर्थकों का कहना है कि यह एक रणनीतिक बहस का हिस्सा है।

राजनीतिक प्रतिक्रिया की संभावना

इस बयान के बाद यह माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाज़ी तेज हो सकती है। रक्षा मामलों पर इस तरह की टिप्पणियों को लेकर अक्सर संसद और सार्वजनिक मंचों पर बहस होती रही है।

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