चांदी की बढ़ती मांग: भारत में 'गरीबों का सोना' बनता नया निवेश विकल्प

सोने की कीमतें 1.5 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुंच गई हैं, जिससे आम जनता के लिए सोना अब दूर का सपना बन गया है। इस परिप्रेक्ष्य में चांदी की कीमतों में पिछले दो वर्षों में 150% से अधिक की तेज़ी देखी गई है, जिससे इसे ‘गरीबों का सोना’ या ‘सफ़ेद सोना’ कहा जाने लगा है। इस लेख में हम चांदी की मौजूदा स्थिति, मांग‑आपूर्ति कारक और भविष्य की संभावनाओं का विश्लेषण करेंगे।

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चांदी की कीमतों में दो साल में 150% से अधिक इजाफा

बीते दो वर्षों में चांदी की कीमतें 2.30 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर को पार कर गईं, जबकि वर्तमान में यह लगभग 2.25 लाख रुपये पर स्थिर है। सोने की कीमतों में गिरावट के बावजूद, चांदी की कीमतें अभी भी उच्च स्तर पर बनी हुई हैं, जिससे निवेशकों और उपभोक्ताओं दोनों का ध्यान इस धातु की ओर आकर्षित हुआ है।

दिवाली में चांदी की मांग में 17‑18% की संभावित बढ़ोतरी

इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) के नेशनल सेक्रेटरी सुरेंद्र मेहता ने बताया कि सोने की कीमतों के कारण चांदी की ओर झुकाव बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि इस दिवाली सीजन में चांदी की खरीद पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 17‑18% तक बढ़ेगी। चांदी की मांग ज्वेलरी, सिक्के, बार और औद्योगिक उपयोग (जैसे सोलर पैनल) से आती है।

निवेशकों की बढ़ती रुचि और ETFs

रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले साल निवेश के लिए चांदी की मांग पारंपरिक खपत से अधिक रही, मुख्य कारण चांदी के ETFs (एक्सचेंज‑ट्रेडेड फंड) में बढ़ती दिलचस्पी है। लंदन स्टॉक एक्सचेंज ग्रुप (LSEG) के लीड मेटल्स एनालिस्ट देबाजीत साहा ने कहा कि चांदी के गहनों की मांग कीमतों के प्रति संवेदनशील बनी हुई है, पर निवेश की मांग मजबूत रहने की संभावना है।

उद्योग की दृष्टि: डिजाइन और क्वालिटी पर फोकस

सेन्को गोल्ड एंड डायमंड्स के मैनेजिंग डायरेक्टर सुवंकर सेन ने बताया कि चांदी ज्वेलरी सेक्टर में ‘बचाव का जरिया’ बन सकती है, जिससे डिजाइन में प्रयोग की गुंजाइश बढ़ेगी। जॉयलुक्कास ग्रुप के चेयरमैन जॉय अलुक्कास ने कहा कि युवा ग्राहक रोज़ पहनने योग्य, किफायती लेकिन स्टाइलिश चांदी की ज्वेलरी की तलाश में हैं, और यह ट्रेंड चांदी को सिर्फ सस्ती धातु नहीं, बल्कि एक अलग कैटेगरी बनाता है।

बाजार की संवेदनशीलता और भविष्य की चुनौतियां

चांदी की कीमतों में 400 रुपये प्रति ग्राम तक की उछाल के बाद फरवरी‑मार्च में गिरावट आई और वर्तमान में 220‑230 रुपये प्रति ग्राम के आसपास स्थिर हैं। साहा ने बताया कि गोल्ड‑सिल्वर रेश्यो के 100 के करीब पहुंचने से सट्टा‑बाज़ी के कारण कीमतों में अस्थायी उछाल आया, पर बुनियादी आधार मजबूत नहीं थे। इस कारण कीमतों में तेज़ी से गिरावट देखी गई।

भारत का चांदी आयात और उत्पादन परिदृश्य

सिल्वर इंस्टीट्यूट के अनुसार, भारत 2024‑25 में रिफाइंड चांदी का सबसे बड़ा आयातक बन गया, आयात लगभग 9.2 अरब डॉलर रहा, जो 2024 की तुलना में 44% अधिक है। हालांकि, 2025 में चांदी के गहनों की मैन्युफैक्चरिंग में लगभग 20% की गिरावट आई, क्योंकि कीमतें रिकॉर्ड ऊँचाई पर पहुंच गई थीं। वैश्विक स्तर पर 2024 में औद्योगिक मांग 680.5 मिलियन औंस तक पहुंची, पर 2026 में भी बाजार छठे साल घाटे में रहने की संभावना है।

मुख्य बातें

  • सोने की कीमत 1.5 लाख रुपये/10 ग्राम, चांदी की कीमत 2.25‑2.30 लाख रुपये/किग्रा.
  • पिछले दो साल में चांदी की कीमतों में 150% से अधिक इजाफा.
  • दिवाली में चांदी की खरीद में 17‑18% की संभावित बढ़ोतरी.
  • निवेशकों की रुचि ETFs और औद्योगिक उपयोग से बढ़ी.
  • उद्योग में डिजाइन‑फोकस और युवा वर्ग की पसंद ने चांदी को ‘सफ़ेद सोना’ बना दिया.
  • गोल्ड‑सिल्वर रेश्यो के अस्थायी उछाल से कीमतों में सट्टा‑बाज़ी का प्रभाव.
  • भारत 2024‑25 में रिफाइंड चांदी का सबसे बड़ा आयातक, आयात 9.2 अरब डॉलर.

सारांश में, सोने की कीमतों के आसमान छूने के कारण चांदी को ‘गरीबों का सोना’ कहा जा रहा है। हालांकि कीमतों में अस्थिरता बनी हुई है, लेकिन ज्वेलरी, औद्योगिक उपयोग और निवेश के क्षेत्रों में बढ़ती मांग इसे भारत की अगली बड़ी सफलता कहानी बना सकती है, बशर्ते उद्योग डिजाइन, गुणवत्ता और स्थिर मूल्य नीति पर ध्यान दे।

GB NEWS INDIA | Category: व्यापार

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