पुणे:सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI) ने बैंकिंग सेक्टर में भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी सफलता हासिल की है। CBI कोर्ट, पुणे ने सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया (CBI Bank) की पिंपरी शाखा से जुड़े बैंक फ्रॉड मामले में दो तत्कालीन अधिकारियों को तीन-तीन साल के कठोर कारावास (Rigorous Imprisonment) की सजा सुनाई है।
CBI द्वारा जारी आधिकारिक प्रेस रिलीज के अनुसार, अदालत ने नंदकिशोर खैरनार, तत्कालीन शाखा प्रबंधक और रवि भूषण प्रसाद, तत्कालीन सहायक प्रबंधक को तीन वर्ष की सजा के साथ 75-75 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। वहीं, सह-उधारकर्ता प्रियंका प्रशांत विस्पुते को दो साल के कठोर कारावास और 25 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई है।
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क्या था पूरा मामला?
CBI ने यह मामला 17 फरवरी 2016 को दर्ज किया था। जांच में सामने आया कि बैंक अधिकारियों और उधारकर्ताओं ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर हाउसिंग लोन स्वीकृत कराया। आरोपियों ने 18.75 लाख रुपये का आवास ऋण पास कराकर बैंक को कुल 24.54 लाख रुपये का नुकसान पहुंचाया।
CBI की जांच में यह भी सामने आया कि आरोपियों ने आपराधिक साजिश के तहत बैंक नियमों की अनदेखी करते हुए ऋण मंजूरी दी। मामले में अलग-अलग साजिशों के तहत छह चार्जशीट दाखिल की गई थीं।
विशेष केस संख्या 21/2018 की सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि साक्ष्य आरोपियों के खिलाफ मजबूत हैं। हालांकि, दो आरोपी— तत्कालीन AGM राकेश जायसवाल और मुख्य उधारकर्ता प्रशांत लक्ष्मण विस्पुते— ट्रायल के दौरान निधन हो जाने के कारण उनके खिलाफ कार्यवाही समाप्त कर दी गई।
बाकी बचे आरोपियों को दोषी ठहराते हुए अदालत ने सजा सुनाई और इसे बैंकिंग सिस्टम में भरोसे की रक्षा के लिए जरूरी कदम बताया।
CBI ने कहा है कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी के मामलों में सख्त कार्रवाई जारी रहेगी और दोषियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।
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