लखनऊ, 5 दिसंबर 2025:उत्तर प्रदेश में चल रही SIR (Special Summary Revision) प्रक्रिया को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने SIR को लेकर राज्य सरकार और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए X (Twitter) पर एक विस्तृत पोस्ट साझा की है, जिसमें उन्होंने चार बड़ी माँगें उठाई हैं।

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उनका आरोप है कि प्रदेश में संगठित तरीके से कुछ वर्गों के वोटरों के नाम हटाने की कोशिश की जा रही है और यह लोकतंत्र के लिए खतरनाक संकेत है।

🔴 अखिलेश यादव की सीधी चार माँगें

1️⃣ SIR का पूरा प्रतिशत आज ही प्रकाशित किया जाएउन्होंने कहा कि जनता को यह जानने का हक है कि यूपी में अब तक कितने प्रतिशत SIR पूरा हुआ है और किस जिले में कितनी प्रगति हुई है।

2️⃣ BLO पर कथित दबाव हटाकर अतिरिक्त स्टाफ लगाया जाएअखिलेश का दावा है कि BLO पर अत्यधिक दबाव बनाया जा रहा है।उन्होंने मांग की कि अतिरिक्त अधिकृत कर्मचारियों को समयावधि के अनुसार इस काम पर लगाया जाए, ताकि प्रक्रिया साफ-सुथरी तरीके से पूरी हो।

3️⃣ सत्ता पक्ष के लोगों को SIR प्रक्रिया से दूर रखा जाएउन्होंने लिखा कि:“सत्ताधारियों के दल और उनके संगी-साथी पिछले दरवाज़े से इस काम में अब नहीं हैं और न आगे कभी होंगे।”यह चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर प्रत्यक्ष सवाल है।

4️⃣ हर विधानसभा में जांच हो कि PDI समाज के नाम हटाने की साज़िश तो नहीं हो रहीअखिलेश ने यह भी दावा किया कि कुछ क्षेत्रों में PDI समाज (पिछड़ा–दलित–इतर) के लोगों का नाम मतदाता सूची से हटाने की कोशिश हो रही है।उन्होंने मांग की कि तुरंत जांच की जाए और किसी भी कीमत पर ऐसा होने से रोकना अनिवार्य है।

🔍 राजनीतिक माहौल गरमायाअखिलेश यादव की इस पोस्ट के बाद यूपी में सियासी बहस छिड़ गई है।विपक्ष इसे लोकतांत्रिक अधिकारों से छेड़छाड़ बता रहा है, जबकि सत्ता पक्ष की ओर से अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।चुनाव आयोग पर भी अब दबाव बढ़ गया है कि वह SIR के आंकड़े और वेरिफिकेशन प्रक्रिया पर स्पष्टीकरण दे

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