AI और डीपफेक के दौर में पर्सनैलिटी राइट्स: 4 साल में 50 सुपरस्टार कोर्ट में

डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म और आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस (AI) के तेज़ विस्तार के साथ भारत में पर्सनैलिटी राइट्स के मामलों में तीव्र वृद्धि देखी जा रही है। 2022 से अब तक 50 से अधिक सुपरस्टार, खिलाड़ी और राजनेता अपने नाम, चेहरा, आवाज़ या विशेष पहचान तत्वों के अनधिकृत उपयोग को लेकर अदालतों में पहुंचे हैं।

यह भी पढ़ें:

Related Update: खुर्जा में भव्य स्वागत: पीएम मोदी के जन्मस्थान वडनगर से वाराणसी जा रही ‘सेवा यात्रा’ का जेवर अड्डा चौराहे पर हुआ अभिनंदन

मुख्य तथ्य

  • 2022‑2026 के बीच 50 पर्सनैलिटी राइट्स के मामले दर्ज हुए।
  • दिल्ली हाई कोर्ट ने 30 सितंबर को विवेक ओबेरॉय, जाह्नवी कपूर और आराध्या बच्चन सहित तीन मामलों की सुनवाई का आदेश दिया।
  • AI‑जनरेटेड वीडियो, क्लोन आवाज़, डीपफेक, फर्जी मर्चेंडाइज़ और सोशल‑मीडिया पर पहचान का व्यावसायिक उपयोग प्रमुख मुद्दे रहे।
  • जाह्नवी कपूर के मामले में 6,884 URLs पर व्यापक रोक की मांग हुई, पर कोर्ट ने केवल 552 URLs हटाने का निर्देश दिया।
  • भारत में पर्सनैलिटी राइट्स के लिए अभी कोई विशेष कानून नहीं है; मौजूदा कॉपीराइट, ट्रेडमार्क और निजता कानूनों पर निर्भर है।

केसों का विस्तार

2022 में अमिताभ बच्चन के नाम, आवाज़ और तस्वीर के अनधिकृत उपयोग के खिलाफ अंतरिम सुरक्षा मिली। इसके बाद 2023 में अनिल कपूर, 2024 में जैकी श्रॉफ, अरिजीत सिंह, रजत शर्मा, विष्णु मांचू और मोहन बाबू, तथा 2025 में ऐश्वर्या राय बच्चन, अभिषेक बच्चन, करण जौहर, ऋतिक रोशन, नागार्जुन, सलमान खान, जया बच्चन और अजय देवगन के खिलाफ समान शिकायतें दर्ज हुईं।

2026 में काजोल, मोहनलाल, वरुण धवन, प्रीति जिंटा, रवि किशन, जाह्नवी कपूर, मनोज बाजपेयी और विवेक ओबेरॉय के नाम पर AI‑जेनरेटेड कंटेंट, डीपफेक और आवाज़ क्लोन के मामलों ने अदालतों का ध्यान आकर्षित किया। विशेष रूप से, वरुण धवन के मामले में नाम, तस्वीर, आवाज़ और likeness के अनऑथराइज्ड इस्तेमाल पर अंतरिम सुरक्षा दी गई।

AI और डीपफेक की नई चुनौतियाँ

पहले जहाँ किसी सेलिब्रिटी की तस्वीर या नाम का दुरुपयोग करने में काफी मेहनत लगती थी, अब AI के माध्यम से चेहरे को किसी भी वीडियो में स्वैप किया जा सकता है, आवाज़ की नकल की जा सकती है और पूरी तरह से फर्जी कंटेंट तैयार किया जा सकता है। इस कारण अदालतें अब केवल फोटो या फर्जी विज्ञापन तक सीमित नहीं, बल्कि AI‑जनरेटेड वीडियो, क्लोन आवाज़, नकली मर्चेंडाइज़ और चैटबॉट में पहचान के उपयोग को भी रोक रही हैं।

फ्री स्पीच बनाम पर्सनैलिटी राइट्स

जाह्नवी कपूर के मामले में कोर्ट ने व्यापक रोक की मांग को अस्वीकार कर 552 URLs को हटाने का निर्देश दिया, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि न्यायालय फ्री स्पीच, पैरोडी और आलोचना को भी ध्यान में रखकर निर्णय ले रहा है। यह संतुलन भविष्य में पर्सनैलिटी राइट्स के कानूनी ढाँचे को आकार देगा।

भविष्य की दिशा

भारत में पर्सनैलिटी राइट्स के लिए अभी कोई विशेष कानून नहीं है, इसलिए मौजूदा कानूनी साधनों—निजता, कॉपीराइट, ट्रेडमार्क और पूर्व के न्यायिक निर्णयों—पर निर्भरता बनी हुई है। शाहरुख खान, अजय देवगन और प्रियंका चोपड़ा ने अपने नाम से जुड़े ट्रेडमार्क भी दर्ज कराए हैं, जो भविष्य में व्यापक पर्सनैलिटी राइट्स कानून के निर्माण की दिशा में एक संकेत हो सकता है।

जैसे-जैसे AI तकनीक विकसित होगी, अदालतों को पहचान के दुरुपयोग को रोकने के लिए अधिक स्पष्ट और सुसंगत दिशा-निर्देश बनाने की आवश्यकता होगी, ताकि व्यक्तियों की गरिमा और व्यावसायिक अधिकार सुरक्षित रह सकें।

GB NEWS INDIA | Category: News

देखें वीडियो

       
Home Latest Contact Video Job