वृंदावन गुरुकुल टैंक हादसे में छात्र रुद्र ने बताया बचाव का भयावह मंजर
2 मिनट में पढ़ें

वृंदावन के चैतन्य विहार स्थित महर्षि पाणिनि संस्कृत गुरुकुल में टैंक में फँसे चार बच्चों को बचाने के प्रयास में छात्र रुद्र ने घटनाक्रम का विस्तृत विवरण दिया। रुद्र की आपबीती ने इस दर्दनाक हादसे की गंभीरता को और स्पष्ट किया।
हादसे का क्रम
टैंक में फँसे बच्चों को एक‑एक करके नीचे उतारा गया। कुछ समय बाद बच्चों की ओर से कोई आवाज न सुनाई देने पर गुरुकुल के गुरुजी ने रुद्र को अंदर जाकर स्थिति देखने को कहा। रुद्र ने बताया कि जब वह टैंक के भीतर पहुँचा तो चार बच्चे बेहोशी की हालत में पड़े हुए थे, जिससे उसका होश उड़ गया।
रुद्र की हालत में गिरावट
बच्चों को उठाने और बाहर निकालने की कोशिश करते हुए रुद्र को भी सांस लेने में कठिनाई और बेहोशी जैसा महसूस होने लगा। उसे अंदाज़ा हो गया कि यदि वह अधिक समय तक टैंक में रहेगा तो उसकी जान भी खतरे में पड़ सकती है। इस कारण उसने गुरुजी को आवाज़ लगाकर मदद के लिए पुकारा।
बचाव कार्य
रुद्र की पुकार सुनकर बाहर मौजूद लोगों ने तुरंत उसकी मदद की और उसे हाथ पकड़कर बाहर खींच लिया। बाहर आने के बाद बचाव दल ने रस्सी के सहारे शेष बच्चों को टैंक से बाहर निकाला। सभी बच्चों को तत्काल उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया।
आपके लिए संबंधित खबरें
परिसर में अफरा‑तफरी
हादसे के बाद गुरुकुल परिसर में चीख‑पुकार और अफरा‑तफरी का माहौल बन गया। चार बच्चों की मृत्यु हो गई, जबकि एक बच्चा गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती है। रुद्र की गवाही ने सुरक्षा व्यवस्था के अभाव को उजागर किया।
सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
टैंक में बच्चों को उतारने से पहले सुरक्षा इंतजामों की कमी और बचाव के दौरान पर्याप्त सुरक्षा उपकरण न होने के कारण कई सवाल उठे हैं। अधिकारियों से इस बात की मांग की जा रही है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कड़े नियम लागू किए जाएँ।
मुख्य बातें
- टैंक में फँसे चार बच्चे बेहोशी की हालत में मिले, सभी की मृत्यु हो गई।
- बच्चों को बचाने के दौरान छात्र रुद्र भी बेहोशी की कगार पर पहुँच गया।
- रुद्र ने गुरुजी को आवाज़ लगाकर मदद के लिए पुकारा, जिससे उसे बाहर निकाला गया।
- बचाव दल ने रस्सी के सहारे शेष बच्चों को बाहर निकाला और अस्पताल ले गया।
- हादसे के बाद गुरुकुल में अफरा‑तफरी और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठे।




टिप्पणियाँ
0