रायपुर / छत्तीसगढ़।भारत के नामचीन साहित्यकार और ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित विनोद कुमार शुक्ल का मंगलवार को रायपुर स्थित All India Institute of Medical Sciences (AIIMS) में निधन हो गया। वे 88 वर्ष के थे और पिछले कई दिनों से गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे, जिसके कारण उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था

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विनोद कुमार शुक्ल को हिंदी साहित्य में उनके अनूठे और सादगी भरे लेखन के लिए व्यापक पहचान मिली थी। उनके काव्य, उपन्यास और कहानी संग्रह ने भारतीय साहित्य की परंपरा को समृद्ध किया और पाठकों के बीच एक अलग पहचान बनाई।

साहित्‍य जगत ने शोक व्यक्त करते हुए कहा कि शुक्ल का जाना हिंदी लेखन के लिए एक अपूरणीय क्षति है। उन्हें 2024 में 59वां ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया था, जो भारत का सबसे प्रतिष्ठित साहित्यिक सम्मान है और ऐसे लेखक को मिलता है जिसने भारतीय भाषा साहित्य को गहराई और नए आयाम दिए हों

विनोद कुमार शुक्ल का जन्म 1 जनवरी 1937 को छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव में हुआ था और उन्होंने जीवनभर हिंदी साहित्य को समर्पित किया। उनकी प्रमुख रचनाओं में कविता, गद्य और उपन्यास दोनों शामिल हैं, जिनमें मानवीय संवेदनाओं, जीवन की बारीकियों और सांस्कृतिक अनुभवों का समावेश स्पष्ट रूप से मिलता है।

उनके देहावसान के बाद साहित्य प्रेमियों, लेखकों और संस्कृति जगत के लोगों ने सामाजिक और साहित्यिक मंचों पर अपनी संवेदना व्यक्त की है। उनका अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा, जिसमें साहित्य जगत की प्रमुख हस्तियाँ हिस्सा लेंगी।

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