सिडनी:ऑस्ट्रेलिया के दिग्गज क्रिकेटर उस्मान ख़्वाजा ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास की घोषणा के बाद चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। ख़्वाजा ने कहा कि उनके करियर के आखिरी दौर में मीडिया और कुछ पूर्व क्रिकेटरों द्वारा की गई लगातार आलोचना ने उन्हें मानसिक रूप से गहराई तक प्रभावित किया। उन्होंने साफ कहा कि यह आलोचना केवल क्रिकेट तक सीमित नहीं थी, बल्कि काफी निजी स्तर तक पहुंच गई थी।
उस्मान ख़्वाजा के मुताबिक, “मेरे बारे में कहा गया कि मैं समर्पित नहीं हूं, केवल अपने बारे में सोचता हूं। यहां तक कहा गया कि मैं मैच से एक दिन पहले गोल्फ खेलता हूं, ट्रेनिंग नहीं करता और आलसी हूं।” ख़्वाजा ने कहा कि ऐसी बातें लगातार करीब पांच दिनों तक चलती रहीं, जिसने उन्हें भीतर से तोड़ दिया।
ख़्वाजा ने भावुक होते हुए कहा कि वे प्रदर्शन से जुड़ी आलोचना को स्वीकार करने के लिए तैयार थे, लेकिन जब उनके चरित्र और मेहनत पर सवाल उठाए गए, तो यह सहन करना मुश्किल हो गया।उन्होंने कहा,
“मैं दो दिन तक यह सब झेल सकता था, लेकिन जब यह लगातार चलता रहा और निजी बन गया, तब मुझे लगा कि अब आगे बढ़ने का वक्त आ गया है।”
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मानसिक दबाव बना संन्यास की वजह
क्रिकेट विश्लेषकों का मानना है कि उस्मान ख़्वाजा का बयान एक बार फिर खिलाड़ियों के मानसिक स्वास्थ्य पर बहस को तेज कर सकता है। आज के दौर में सोशल मीडिया, टीवी डिबेट्स और एक्सपर्ट कमेंट्स खिलाड़ियों पर भारी दबाव डालते हैं, जिसका असर उनके करियर फैसलों पर भी पड़ता है।
क्रिकेट जगत में प्रतिक्रिया
ख़्वाजा के इस बयान के बाद कई मौजूदा और पूर्व क्रिकेटरों ने उनके समर्थन में आवाज़ उठाई है। खेल जगत का मानना है कि आलोचना और अपमान के बीच की रेखा को समझना बेहद ज़रूरी है, ताकि खिलाड़ियों का मनोबल न टूटे।
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