लखनऊ:उत्तर प्रदेश में ब्लड बैंकों की व्यवस्था को और मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया जा रहा है। प्रदेश के विभिन्न मंडलों में ब्लड बैंकों का नेटवर्क सिस्टम तैयार किया जाएगा, जिससे थैलेसीमिया सहित अन्य गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को समय पर हर ब्लड ग्रुप का रक्त उपलब्ध कराया जा सकेगा। इस नेटवर्क के जरिए एक ब्लड बैंक में उपलब्ध रक्त की जानकारी दूसरे ब्लड बैंकों से साझा की जाएगी, जिससे जरूरत के समय तुरंत रक्त की व्यवस्था हो सके।

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सरकारी आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में इस समय करीब 400 ब्लड बैंक संचालित हैं और हर साल लगभग 25 लाख यूनिट रक्त की आवश्यकता होती है। कई बार एक ब्लड बैंक में रक्त की कमी हो जाती है, जबकि दूसरे ब्लड बैंक में वही रक्त एक्सपायर हो जाता है। नए नेटवर्क सिस्टम के लागू होने से रक्त के एक्सपायर होने की समस्या काफी हद तक खत्म होने की उम्मीद है और उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सकेगा।

इस योजना के पहले चरण में हरदोई, लखीमपुर खीरी, रायबरेली, सीतापुर और उन्नाव के ब्लड बैंकों को आपस में जोड़ा जाएगा। इन जिलों में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर नेटवर्क सिस्टम लागू किया जाएगा, ताकि इसकी कार्यप्रणाली और प्रभाव का आकलन किया जा सके। यदि यह प्रयोग सफल रहता है, तो भविष्य में इसे पूरे उत्तर प्रदेश में लागू करने की योजना है।

स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि इस नेटवर्क के माध्यम से न केवल थैलेसीमिया मरीजों को नियमित रूप से रक्त मिल सकेगा, बल्कि आपातकालीन स्थितियों में भी मरीजों की जान बचाने में मदद मिलेगी। साथ ही, ब्लड बैंकों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होने से प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को नई मजबूती मिलेगी।

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