Skip to content
Wednesday, 28 October 2026|India
28 Octआज की खबरें
ऐप डाउनलोड
🔴 ब्रेकिंग न्यूज़
पैरा-एथलीट नीरज यादव की संदिग्ध मौत, महिला दोस्त के कनेक्शन से नई जानकारी•मैड्रिड के दक्षिण में दो ट्रेनों की टक्कर से कम से कम 30 मौतें•सारण के भैंसमारा में ट्रक‑टेंपो टक्कर से 9 महीने की बच्ची सहित 4 की मौत•पैरा एथलीट नीरज यादव की आत्महत्या: 42 साल के तीन बार एशियन पैरा गेम्स के गोल्ड मेडलिस्ट का दुखद अंत•संभल में गंगा एक्सप्रेसवे पर स्लीपर बस का भीषण हादसा, 150 सवार, 20 से अधिक घायल•बेंगलुरु में DRDO के वरिष्ठ वैज्ञानिक शरद कटियार की दुखद मौत, पिता की असहाय कोशिश•चक्रवात ‘अर्नब’ का महासंकट: लैंडफॉल से पहले समुद्र का पानी गांव में घुसा, अलर्ट जारी•बीजेपी का ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ मार्च आज दिल्ली में शुरूपैरा-एथलीट नीरज यादव की संदिग्ध मौत, महिला दोस्त के कनेक्शन से नई जानकारी•मैड्रिड के दक्षिण में दो ट्रेनों की टक्कर से कम से कम 30 मौतें•सारण के भैंसमारा में ट्रक‑टेंपो टक्कर से 9 महीने की बच्ची सहित 4 की मौत•पैरा एथलीट नीरज यादव की आत्महत्या: 42 साल के तीन बार एशियन पैरा गेम्स के गोल्ड मेडलिस्ट का दुखद अंत•संभल में गंगा एक्सप्रेसवे पर स्लीपर बस का भीषण हादसा, 150 सवार, 20 से अधिक घायल•बेंगलुरु में DRDO के वरिष्ठ वैज्ञानिक शरद कटियार की दुखद मौत, पिता की असहाय कोशिश•चक्रवात ‘अर्नब’ का महासंकट: लैंडफॉल से पहले समुद्र का पानी गांव में घुसा, अलर्ट जारी•बीजेपी का ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ मार्च आज दिल्ली में शुरू
विज्ञापन
Home » यूक्रेनी सैनिक कोस्तियांतिन व्लासेंको की 491‑दिन की जीवित रहने की कहानी: खुद पैर काट कर बचाव और ड्रोन रेस्क्यू
दुनिया

यूक्रेनी सैनिक कोस्तियांतिन व्लासेंको की 491‑दिन की जीवित रहने की कहानी: खुद पैर काट कर बचाव और ड्रोन रेस्क्यू

3 मिनट में पढ़ें

By Kishan kumar Jain• प्रकाशित 28 Oct 2026• अपडेट 28 Oct 2026
GB News India ऐप डाउनलोड करेंGoogle Play Store पर उपलब्ध
यूक्रेनी सैनिक कोस्तियांतिन व्लासेंको की 491‑दिन की जीवित रहने की कहानी: खुद पैर काट कर बचाव और ड्रोन रेस्क्यू
रूस‑यूक्रेन युद्ध में यूक्रेनी सैनिक कोस्तियांतिन व्लासेंको 491 दिनों तक ड्रेनेज पाइप में फंसे रहे, अपने घायल पैर को खुद काट कर बचाव किया और बाद में ड्रोन द्वारा बचाया गया।

रूस‑यूक्रेन युद्ध के बीच एक अद्भुत जीवित रहने की कहानी सामने आई है। यूक्रेनी सैनिक कोस्तियांतिन व्लासेंको ने 491 दिनों तक एक कंक्रीट ड्रेनेज पाइप में फंसे रहने के बाद, अपने घायल पैर को खुद काट कर बचाव किया और फिर एक अनोखे ड्रोन रेस्क्यू ऑपरेशन से सुरक्षित निकाले गए। यह घटना सैन्य इतिहास में पहला दर्ज किया गया ड्रोन‑रिस्क्यू बन गया।

घटना की पृष्ठभूमि

खारकिव में रूसी बमबारी के दौरान कोस्तियांतिन व्लासेंको और उनके साथियों को एक तीव्र हमले का सामना करना पड़ा। बमबारी के बाद उनका दस्ता बिखर गया और व्लासेंको गंभीर रूप से घायल हो गया। बचाव के विकल्प सीमित होने के कारण, उन्होंने एक ठंडे, अंधेरे कंक्रीट ड्रेनेज पाइप में छिपने का फैसला किया।

491 दिन का अंधकार

व्लासेंको ने लगभग 1 वर्ष और 4 महीने (491 दिन) तक उस ड्रेनेज पाइप में जीवित रहने का संघर्ष किया। इस दौरान उन्हें भोजन, पानी और प्रकाश की कोई सुविधा नहीं थी। उनका शरीर अत्यधिक क्षय और संक्रमण से ग्रस्त हो गया, विशेषकर एक पैर में गंभीर संक्रमण था जो जीवन के लिए खतरा बन गया।

स्वयं पैर काटना – अंतिम उपाय

संक्रमण के कारण जीवन‑धमकी को देखते हुए, व्लासेंको ने अपने पैर को खुद काटने का कठिन निर्णय लिया। यह कदम उनके जीवित रहने के लिए एकमात्र विकल्प था। इस आत्म-शल्यक्रिया के बाद उनका संक्रमण नियंत्रित हो गया और उन्हें आगे के बचाव के लिए तैयार किया गया।

आपके लिए संबंधित खबरें

ड्रोन द्वारा बचाव

व्लासेंको की स्थिति को अंततः एक विशेष ड्रोन रेस्क्यू टीम ने पहचाना। यह टीम ड्रोन के माध्यम से स्थान का पता लगाकर, आवश्यक चिकित्सा सामग्री और बचाव उपकरण पहुंचाने में सफल रही। ड्रोन ने व्लासेंको को सुरक्षित रूप से बाहर निकाला, जिससे वह पहली बार युद्ध क्षेत्र में ड्रोन द्वारा बचाए गए सैनिक बन गए।

मुख्य बातें

  • कोस्तियांतिन व्लासेंको ने 491 दिनों तक कंक्रीट ड्रेनेज पाइप में फंसे रहे।
  • गंभीर संक्रमण से बचने के लिए उन्होंने अपना पैर खुद काटा।
  • ड्रोन रेस्क्यू ऑपरेशन के माध्यम से उन्हें सुरक्षित निकाला गया, जो सैन्य इतिहास में पहला दर्ज किया गया ड्रोन‑रिस्क्यू है।
  • यह घटना युद्ध के दौरान मानवीय दृढ़ता और तकनीकी नवाचार दोनों को उजागर करती है।

संदेश और प्रभाव

व्लासेंको की कहानी युद्ध के अंधेरे में भी मानव आत्मा की अटूट शक्ति को दर्शाती है। साथ ही, यह दिखाती है कि आधुनिक तकनीक—विशेषकर ड्रोन—कैसे जीवन बचाने में नई संभावनाएँ खोल रही है। भविष्य में ऐसी तकनीकों का उपयोग युद्ध‑क्षेत्र में त्वरित बचाव और चिकित्सा सहायता के लिए बढ़ाया जा सकता है।

यह खबर शेयर करें: WhatsApp Facebook X Telegram
💬 0 टिप्पणियाँ

टिप्पणियाँ

0

अपनी टिप्पणी लिखें

Your email address will not be published. Required fields are marked *