सुप्रीम कोर्ट ने नंदीग्राम उपचुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी मिलन प्रधान को अंतरिम जमानत दी, राज्य की याचिका खारिज
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पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम उपचुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी मिलन प्रधान को सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी राहत दी। कोर्ट ने राज्य सरकार की याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें कलकत्ता हाईकोर्ट के 29 सितंबर के आदेश को चुनौती दी गई थी। इस आदेश के तहत मिलन प्रधान को 2007 के भूमि अधिग्रहण आंदोलन से जुड़े छह आपराधिक मामलों में अंतरिम जमानत दी गई थी, जिनमें से चार में हत्या के आरोप शामिल हैं।
सुप्रीम कोर्ट का आदेश
सुप्रीम कोर्ट की मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने कहा कि प्रधान को दी गई अंतरिम जमानत का मुख्य उद्देश्य चुनाव लड़ना और वोटों की गिनती में भाग लेना है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वह मामले के गुण‑दोष पर कोई राय नहीं दे रही है। यदि प्रधान जमानत को बढ़ाने या नियमित जमानत में बदलने की मांग करता है, तो पश्चिम बंगाल सरकार के तर्क खुले रहेंगे।
जमानत की शर्तें
कोर्ट ने प्रधान को 20 अक्टूबर तक जमानत दी, जबकि वोटिंग 6 अक्टूबर को समाप्त हो चुकी है और वोटों की गिनती 9 अक्टूबर को होगी। प्रधान को 21 अक्टूबर तक सरेंडर करना होगा। यह शर्तें हाईकोर्ट के आदेश के अनुरूप हैं, जिसमें जमानत की अवधि समाप्त होने के बाद हल्दिया कोर्ट में सरेंडर करने का निर्देश दिया गया था।
पश्चिम बंगाल सरकार की याचिका
राज्य ने हाईकोर्ट के जस्टिस तीर्थंकर घोष के 29 सितंबर के आदेश को चुनौती दी थी। सरकार ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के माध्यम से तत्काल सुनवाई की मांग की थी, यह तर्क देते हुए कि मिलन प्रधान पर हत्या के आरोप हैं और उन्हें केवल चुनाव लड़ने के लिए जमानत दी गई है। मेहता ने कहा कि चुनाव 6 अक्टूबर को होने वाला है, इसलिए सुनवाई जल्दी होनी चाहिए।
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मुख्य न्यायाधीश ने गुरुवार को सुनवाई के अनुरोध को खारिज कर दिया और कहा कि मामला 5 अक्टूबर को, यानी वोटिंग से एक दिन पहले, सुना जाएगा। उन्होंने संकेत दिया कि राज्य की याचिका को खारिज किया जाएगा, और बाद में यह खारिजी आधिकारिक रूप से घोषित की गई।
पृष्ठभूमि
नंदीग्राम उपचुनाव के लिए नामांकन पत्र दाखिल करने के बाद 18 सितंबर को मिलन प्रधान को गिरफ्तार किया गया था। उनकी गिरफ्तारी 2007 के जमीन अधिग्रहण‑विरोधी आंदोलन के दौरान हुई घटनाओं से जुड़ी छह मामलों के आधार पर थी। प्रधान ने हाईकोर्ट में दलील दी कि ये मामले दो दशक पुराने हैं और उन्हें चुनाव प्रचार करने की अनुमति दी जानी चाहिए। हाईकोर्ट ने अंततः उन्हें अंतरिम जमानत दी, जिससे वे 6 अक्टूबर के उपचुनाव में भाग ले सके।
मुख्य बातें
- सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार की याचिका खारिज कर दी।
- कांग्रेस प्रत्याशी मिलन प्रधान को 20 अक्टूबर तक अंतरिम जमानत मिली।
- जमानत का उद्देश्य चुनाव लड़ना और वोटों की गिनती में भाग लेना है।
- कोर्ट ने मामले के गुण‑दोष पर कोई राय नहीं दी।
- प्रधान को 21 अक्टूबर तक सरेंडर करना होगा।
यह निर्णय नंदीग्राम उपचुनाव के बाद की राजनीतिक स्थिति को प्रभावित करेगा, क्योंकि मिलन प्रधान अब कानूनी बाधाओं के बिना अपने निर्वाचन क्षेत्र में कार्य कर सकते हैं।




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