मिर्जापुर के विंध्याचल में नवजात शिशु को नाले में पाया, स्थानीय लोगों ने बचाई
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उत्तरी प्रदेश के मिर्जापुर जिले के विंध्याचल में एक दुखद घटना ने स्थानीय लोगों को हिला कर रख दिया। एक नवजात शिशु को जन्म के कुछ ही घंटों बाद नाले में छोड़ दिया गया, लेकिन उसकी सिसकियों की आवाज़ ने आसपास के ग्रामीणों को सतर्क कर दिया और शिशु को बचाने में मदद की।
घटना का विवरण
बुधवार की सुबह, सिकरा कला गांव के खेतों की ओर जाते समय ग्रामीणों ने कीचड़ से भरे नाले में रोती-सीसकती एक शिशु को देखा। स्थानीय लोगों के अनुसार, शिशु की माँ ने जन्म के तुरंत बाद ही उसे नाले में डाल दिया। शिशु की आवाज़ सुनकर पास के लोग तुरंत मौके पर पहुंचे और उसे नाले से बाहर निकालने में मदद की।
पुलिस और अस्पताल की कार्रवाई
स्थानीय पूर्व प्रधान सोनू पाठक ने तुरंत 112 पर कॉल करके पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर ग्रामीणों की मदद से शिशु को नाले से बाहर निकाला और उसे विजयपुर सर्रोई स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) में ले गई। PHC में डॉ. रत्नाकर मिश्रा ने शिशु का प्रारंभिक स्वास्थ्य परीक्षण किया और प्राथमिक उपचार के बाद उसे बड़े अस्पताल में रेफर किया गया।
शिशु की वर्तमान स्थिति
पुलिस के अनुसार, शिशु की हालत नाजुक थी, लेकिन अस्पताल में उपचार शुरू होने के बाद उसकी स्थिति में सुधार हो रहा है। अभी तक शिशु की पहचान या माँ की पहचान स्पष्ट नहीं हुई है, और पुलिस मामले की जांच जारी रखी हुई है।
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मुख्य बातें
- विंध्याचल के सिकरा कला गांव में नवजात शिशु को कीचड़ भरे नाले में पाया गया।
- शिशु की सिसकियों की आवाज़ ने स्थानीय ग्रामीणों को सतर्क किया।
- स्थानीय पूर्व प्रधान ने 112 पर पुलिस को सूचना दी।
- पुलिस ने शिशु को स्थानीय PHC में पहुंचाया, जहाँ डॉ. रत्नाकर मिश्रा ने प्राथमिक उपचार किया।
- शिशु को बड़े अस्पताल में रेफर किया गया और उसकी हालत में सुधार हो रहा है।
- मामले की जांच जारी है; माँ की पहचान अभी तक नहीं हुई।
पुलिस की टिप्पणी
पुलिस ने कहा कि शिशु की स्थिति नाजुक है, लेकिन उपचार के बाद उसकी सेहत में सुधार दिख रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि अभी तक कोई ठोस जानकारी नहीं है कि शिशु को क्यों नाले में छोड़ दिया गया। जांच के दौरान यह भी जांच की जा रही है कि क्या यह बच्चा किसी अनिच्छित गर्भधारण का परिणाम है।
समुदाय की प्रतिक्रिया
घटना की सूचना पर पूरे गांव के लोग नाले के पास इकट्ठा हो गए। बदबू की परवाह किए बिना उन्होंने शिशु को बाहर निकाला और उसकी देखभाल में मदद की। रेखा देवी सहित कई गांव वाले शिशु के साथ रहे और उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करने में सहयोग दिया।
यह घटना सामाजिक जागरूकता और नवजात शिशु संरक्षण के महत्व को फिर से उजागर करती है। स्थानीय प्रशासन और पुलिस ने इस मामले में शीघ्र कार्रवाई की, जिससे शिशु को बचाया जा सका।




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