नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। शीर्ष अदालत ने दिल्ली नगर निगम (MCD) को स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा है कि प्रदूषण को बढ़ावा देने वाली गतिविधियों पर तत्काल नियंत्रण जरूरी है। कोर्ट ने खास तौर पर सर्दियों के महीनों में टोल वसूली को लेकर अहम टिप्पणी की है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दिल्ली में टोल प्लाजा पर लगने वाला ट्रैफिक जाम वायु प्रदूषण बढ़ाने की बड़ी वजह बन रहा है। अदालत ने MCD से अपेक्षा जताई कि अगले साल 1 अक्टूबर से 31 जनवरी के बीच टोल न लगाए जाने की दिशा में गंभीर प्रयास किए जाएं, ताकि प्रदूषण के स्तर को नियंत्रित किया जा सके।
🚨 टोल से क्यों बढ़ता है प्रदूषण?
कोर्ट ने कहा कि टोल प्लाजा पर वाहनों की लंबी कतारें लगती हैं, जिससे गाड़ियां लंबे समय तक चालू रहती हैं। इससे कार्बन उत्सर्जन बढ़ता है और हवा की गुणवत्ता और खराब हो जाती है। खासकर सर्दियों में पहले से ही स्मॉग और धुंध की समस्या गंभीर रहती है।
🏛️ MCD को दी सख्त चेतावनी
सुप्रीम कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि वह MCD की कार्यप्रणाली से संतुष्ट नहीं है। अदालत ने संकेत दिया कि यदि ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो टोल वसूली से जुड़े मामलों में सख्त आदेश दिए जा सकते हैं।
🌫️ दिल्ली में प्रदूषण बना गंभीर संकट
गौरतलब है कि हर साल अक्टूबर से जनवरी के बीच दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण खतरनाक स्तर पर पहुंच जाता है। वाहनों का धुआं, ट्रैफिक जाम और टोल प्लाजा पर लगने वाली भीड़ इस संकट को और बढ़ा देती है।
सुप्रीम कोर्ट का यह निर्देश ऐसे समय आया है जब दिल्ली की हवा लगातार ‘बेहद खराब’ और ‘गंभीर’ श्रेणी में दर्ज की जा रही है। अदालत का मानना है कि टोल व्यवस्था में बदलाव से प्रदूषण नियंत्रण की दिशा में ठोस सुधार हो सकता है।
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