हरियाणा की सुमन गोयल को मिला राष्ट्रीय सर्वश्रेष्ठ शिक्षक पुरस्कार

हरियाणा के एक छोटे से गाँव में जन्मी सुमन गोयल ने गरीबी, पारिवारिक विरोध और व्यक्तिगत त्रासदी को पार कर राष्ट्रीय सर्वश्रेष्ठ शिक्षक पुरस्कार जीतकर अपने नाम को इतिहास में दर्ज किया है। 60 रुपये की शुरुआती वेतन से शुरू हुआ उनका सफर अब देशभर में प्रेरणा बन गया है।

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प्रारम्भिक जीवन और शिक्षा

सुमन गोयल का जन्म हरियाणा के एक अत्यंत गरीब परिवार में हुआ। बचपन से ही वह पढ़ाई में तेज थीं, लेकिन 10वीं के बाद परिवार की आर्थिक तंगी ने उनकी पढ़ाई रोक दी। अपने परिवार के विरोध के बावजूद, उन्होंने ट्यूशन पढ़ाकर 12वीं की पढ़ाई पूरी की।

दिल्ली में पहला रोजगार

रोजी‑रोटी की तलाश में सुमन दिल्ली चली गईं, जहाँ उन्होंने एक निजी स्कूल में ट्यूशन देना शुरू किया। बाद में एक सरकारी स्कूल में संविदा पर शिक्षक का पद मिला, जिसमें उनका वेतन केवल 60 रुपये था। इस सीमित आय से उन्होंने अपनी कॉलेज की पढ़ाई जारी रखी।

स्थायी शिक्षक बनना और दो दशकों की सेवा

शादी के बाद भी सुमन ने पढ़ाई नहीं छोड़ी। इस दौरान उनके माता‑पिता गंभीर रूप से बीमार हो गए और उनका निधन हो गया। इन व्यक्तिगत कठिनाइयों के बावजूद, उनके पति ने उनका उत्साह बढ़ाया और सुमन को उसी स्कूल में स्थायी शिक्षक बनने का अवसर मिला। आज वह उसी स्कूल में लगभग दो दशकों से शिक्षक हैं।

शिक्षण में नवाचार: गणित किट

सुमन ने देखा कि कई छात्र गणित से डरते हैं। इस डर को दूर करने के लिए उन्होंने एक विशेष गणित किट विकसित किया, जिससे छात्र खेल‑खेल में गणित के मूलभूत सिद्धांत सीखते हैं। इस प्रयोग ने छात्रों की भागीदारी और समझ में उल्लेखनीय सुधार किया।

समाजसेवा और आर्थिक सहायता

शिक्षा के अलावा, सुमन आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को समय‑समय पर स्वेटर, स्टेशनरी और अन्य आवश्यक वस्तुएँ वितरित करती हैं। उनका मानना है कि शैक्षिक सफलता केवल कक्षा तक सीमित नहीं, बल्कि सामाजिक समर्थन से भी जुड़ी है।

पुरस्कार और मान्यताएँ

हरियाणा सरकार ने पहले भी सुमन को सर्वश्रेष्ठ शिक्षक के रूप में सम्मानित किया था। अब केंद्र सरकार ने उनके नवोन्मेषी शिक्षण विधियों, छात्रों को दी गई सहायता और सामाजिक योगदान को देखते हुए उन्हें 2026 के राष्ट्रीय सर्वश्रेष्ठ शिक्षक पुरस्कार के लिए चुना है। यह पुरस्कार उनके निरंतर प्रयासों और समर्पण का प्रतिफल है।

मुख्य बातें

  • सुमन गोयल का जन्म हरियाणा के गरीब परिवार में हुआ।
  • ट्यूशन पढ़ाकर 12वीं की पढ़ाई पूरी की, फिर दिल्ली में 60 रुपये की वेतन वाली संविदा नौकरी मिली।
  • दो दशकों से एक ही स्कूल में शिक्षक के रूप में कार्यरत।
  • गणित के डर को दूर करने के लिए विशेष गणित किट विकसित की।
  • आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को स्वेटर, स्टेशनरी आदि प्रदान करती हैं।
  • 2026 में राष्ट्रीय सर्वश्रेष्ठ शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित।

सुमन गोयल की कहानी यह सिद्ध करती है कि दृढ़ संकल्प, नवाचार और सामाजिक जिम्मेदारी के साथ कोई भी बाधा पार की जा सकती है। उनका सफर न केवल शिक्षकों के लिए बल्कि हर उस व्यक्ति के लिए प्रेरणा है जो गरीबी और सामाजिक चुनौतियों के बावजूद अपने सपनों को साकार करना चाहता है।

GB NEWS INDIA | Category: शिक्षा

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