राहुल‑प्रियंका गांधी की हिरासत के बाद SIR विरोध का अगला चरण क्या?
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दिल्ली पुलिस ने आकाशवाणी भवन परिसर में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को पहले हिरासत में ले लिया और फिर रिहा कर दिया। यह कार्रवाई तब हुई जब विपक्षी नेता SIR (सुपरवाइज़र ऑफ इलेक्शन) और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। इस घटना के बाद विपक्षी गठबंधन के भीतर अगली रणनीति और चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया पर चर्चा तेज़ हो गई है।
घटना का क्रम
विरोध प्रदर्शन की शुरुआत सुबह 10.30 बजे हुई, जब कांग्रेस सांसद और INDIA ब्लॉक के अन्य सांसदों ने संसद भवन से चुनाव आयोग मुख्यालय तक मार्च किया। पुलिस ने रास्ते में बैरिकेड लगा कर मार्च को रोक दिया, पर प्रदर्शनकारियों ने पहले बैरिकेड को तोड़ कर आगे बढ़ते हुए नीति आयोग के निकट दूसरे बैरिकेड तक पहुँच गए। पुलिस ने कई बार धारा 163 BNSS के तहत प्रतिबंधों की सूचना दी और शांतिपूर्वक हटने की अपील की, पर प्रदर्शनकारियों ने इन निर्देशों को नज़रअंदाज़ किया।
लगभग 260 व्यक्तियों, जिनमें 10 सांसद शामिल थे, को निरुद्ध कर विभिन्न पुलिस थानों में ले जाया गया। अधिकांश प्रदर्शनकारी इस दौरान हट गए, पर राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल, पवन खेड़ा, मनीष छत्रथ और लगभग 5,060 समर्थक बिना अनुमति के आकाशवाणी भवन परिसर में प्रवेश कर धरने पर बैठ गए। राहुल ने कहा कि जब तक सांसदों के प्रतिनिधिमंडल को चुनाव आयोग (ECI) से मिलने का समय नहीं दिया जाता, वे परिसर से नहीं निकलेंगे।
हिरासत और रिहाई
रात 8 बजे के करीब पुलिस ने आकाशवाणी भवन को खाली कराना शुरू किया। इस दौरान राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, केसी वेणुगोपाल और कुछ अन्य नेताओं को हिरासत में लिया गया। लगभग दो घंटे बाद, पुलिस ने उन्हें रिहा कर दिया, यह बताते हुए कि धरना गैरकानूनी था और अनुमति नहीं ली गई थी।
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चुनाव आयोग का बयान
चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि मंगलवार शाम 4 बजे तक किसी भी राजनीतिक दल ने अपने अधिकृत प्रतिनिधि के माध्यम से आयोग से मिलने का समय नहीं मांगा था। आयोग ने बताया कि 2025 में निर्धारित प्रक्रिया के तहत प्रतिनिधि के माध्यम से अनुरोध किया जाता है और दोनों पक्षों की सहमति से समय तय होता है।
जब सांसदों के प्रतिनिधिमंडल ने संसद भवन एनेक्सी में 240 सांसदों के समूह के साथ बैठक का प्रस्ताव रखा, तो आयोग ने इसे असामान्य बताया और कहा कि प्रोटोकॉल के अनुसार ऐसी बैठक आयोग के परिसर में ही होनी चाहिए। आयोग ने अपने वरिष्ठ अधिकारी को बैठक स्थल पर भेजने का प्रस्ताव भी रखा, पर यह भी सांसदों द्वारा अस्वीकार किया गया।
पुलिस और भाजपा की प्रतिक्रियाएँ
दिल्ली पुलिस ने कहा कि मार्च के लिए अनुमति नहीं मांगी गई थी और आकाशवाणी भवन पर धरना गैरकानूनी था। भाजपा प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने चुनाव आयोग के बयान के बाद कहा कि राहुल गांधी का झूठ बेनकाब हो गया है, क्योंकि उन्होंने आयोग से मिलने का समय नहीं मांगा था।
मुख्य बातें
- राहुल‑प्रियंका गांधी को आकाशवाणी भवन में हिरासत में लिया गया, फिर रिहा किया गया।
- विरोध प्रदर्शन SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर केंद्रित था।
- पुलिस ने मार्च के दौरान कई बैरिकेड लगाए, पर प्रदर्शनकारियों ने उन्हें तोड़ दिया।
- चुनाव आयोग ने कहा कि किसी भी दल से मुलाकात का अनुरोध प्रक्रिया के अनुसार किया जा सकता है, पर इस बार कोई औपचारिक अनुरोध नहीं मिला।
- भाजपा ने राहुल गांधी के बयान को झूठा करार दिया।
- कांग्रेस सूत्रों के अनुसार, संसद भवन के मकर द्वार पर एक और विरोध प्रदर्शन और राष्ट्रपति भवन की ओर मार्च की योजना पर चर्चा चल रही है।
आगे क्या हो सकता है?
कांग्रेस के भीतर यह चर्चा जारी है कि अगले मार्च की तिथि और मार्ग तय किया जाए। कुछ नेताओं ने बुधवार को मार्च करने का सुझाव दिया है, पर यह राहुल गांधी की हिरासत से रिहाई पर निर्भर करेगा। चुनाव आयोग ने फिर भी कहा कि कोई भी राजनीतिक दल समय-समय पर अनुरोध कर सकता है, और प्रक्रिया के अनुसार ही बैठक तय होगी। इस बीच, दिल्ली पुलिस ने कहा कि भविष्य में बिना अनुमति के धरने को गैरकानूनी माना जाएगा और कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
संपूर्ण स्थिति यह दर्शाती है कि चुनाव आयोग, पुलिस और विपक्षी दलों के बीच प्रक्रिया, अनुमति और लोकतांत्रिक अधिकारों को लेकर तनाव बना हुआ है। आगे के विकास को देखते हुए, दोनों पक्षों को संवाद के माध्यम से समाधान खोजने की आवश्यकता स्पष्ट है।



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