पंजाब के OSD राजबीर सिंह घुम्मन ने हाईकोर्ट में CBI की FIR और छापेमारी को चुनौती दी
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पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के ओफ़िसर ऑन स्पेशल ड्यूटी (OSD) राजबीर सिंह घुम्मन ने आज गुरुवार को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में एक सिविल रिट याचिका दायर कर CBI की उनके खिलाफ दर्ज FIR और पैतृक निवास पर की गई छापेमारी को रोकने की मांग की। यह कदम उन्होंने वकील गिन्नीजीत मल्होत्रा के माध्यम से उठाया, जिसमें उन्होंने धारा 17A के तहत वैधानिक मंजूरी न मिलने पर CBI की पूरी जांच प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगाने की गुहार लगाई।
याचिका का कानूनी आधार
घुम्मन की याचिका का मुख्य आधार यह है कि CBI ने Prevention of Corruption Act, 1988 की धारा 17A का उल्लंघन किया है। इस धारा के अनुसार, किसी भी सार्वजनिक अधिकारी (Public Servant) के खिलाफ उसकी आधिकारिक भूमिका या निर्णयों से जुड़ी जांच शुरू करने से पहले सक्षम सरकार, यानी इस मामले में पंजाब सरकार, से पूर्व मंजूरी लेना अनिवार्य है। घुम्मन का दावा है कि CBI ने इस मंजूरी को नहीं लिया।
मुख्य माँगें
याचिका में घुम्मन ने तीन प्रमुख माँगें रखी हैं:
- धारा 17A के तहत पंजाब सरकार से वैधानिक मंजूरी मिलने तक CBI की FIR और जांच पर तुरंत अंतरिम रोक।
- याचिका के निर्णय तक घुम्मन के खिलाफ कोई भी दंडात्मक या दबावपूर्ण कार्रवाई (जैसे गिरफ्तारी) न की जाए।
- 6 अक्टूबर को संगरूर के घराचों गांव में ली गई छापेमारी और जब्ती को गैर‑कानूनी घोषित कर, चंडीगढ़ स्पेशल कोर्ट द्वारा जारी सर्च वारंट को रद्द किया जाए।
पिछला संदर्भ
CBI ने राजबीर सिंह घुम्मन के खिलाफ एक FIR दर्ज की थी, जिसमें भ्रष्टाचार से जुड़े आरोप लगाए गए थे। इसके बाद 6 अक्टूबर को उनके पैतृक घर पर छापेमारी की गई, जिसमें कुछ सामग्री जब्त की गई। घुम्मन ने इस कार्रवाई को वैधता के अभाव के कारण चुनौती दी।
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हाईकोर्ट की संभावित भूमिका
हाईकोर्ट को अब यह तय करना होगा कि क्या CBI ने धारा 17A के प्रावधानों का उल्लंघन किया है और क्या याचिका में मांगी गई अंतरिम रोक को मंजूरी दी जानी चाहिए। यदि कोर्ट ने घुम्मन की माँगों को स्वीकार किया, तो CBI को FIR के तहत आगे की जांच या किसी भी दंडात्मक कदम से पहले पंजाब सरकार की लिखित मंजूरी लेनी पड़ेगी।
मुख्य बातें
- राजबीर सिंह घुम्मन ने हाईकोर्ट में CBI की FIR और छापेमारी को रोकने की याचिका दायर की।
- याचिका का आधार धारा 17A के तहत वैधानिक मंजूरी की आवश्यकता है, जिसे CBI ने नहीं लिया।
- तीन मुख्य माँगें: जांच पर रोक, दंडात्मक कार्रवाई से सुरक्षा, और छापेमारी को गैर‑कानूनी घोषित करना।
- हाईकोर्ट का निर्णय CBI की आगे की कार्रवाई को प्रभावित कर सकता है।
अभी तक हाईकोर्ट ने याचिका पर कोई अंतिम आदेश नहीं दिया है, और मामले की सुनवाई आगे चलकर होगी।




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