CBI ने मुंबई में CPWD के कार्यकारी अभियंता सहित 5 लोगों को गिरफ्तार किया, 53.87 लाख नकद बरामद
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केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने मुंबई में एक बड़े रिश्वतखोरी मामले में कार्रवाई करते हुए केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (CPWD) के कार्यकारी अभियंता, उसके रिश्तेदार और एक रियल एस्टेट ग्रुप के तीन अधिकारियों को गिरफ्तार किया। यह कार्रवाई वडाला में निर्माण परियोजना के लिए अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) जारी करने के बदले ली गई रिश्वत से जुड़ी है।
गिरफ्तारी के मुख्य तथ्य
- गिरफ्तार: CPWD के कार्यकारी अभियंता विक्रांत वर्मा, उसके रिश्तेदार सौरज कुमार, बाया ग्रुप के वाइस प्रेसिडेंट अरविंद सेमवाल, मैनेजर चेतन महाजन और रिनेसां फर्म के पार्टनर अनिल देशमुख।
- गिरफ्तारी की तिथि: 1 अक्टूबर 2026 को जाल बिछाने के बाद, नवी मुंबई के वाशी में कार्यकारी अभियंता को पकड़ा गया।
- रिश्वत की रकम: प्रारम्भिक माँग 1 करोड़ रुपये, बाद में 70 लाख रुपये तय; 50 लाख रुपये की रिश्वत सौरज कुमार के माध्यम से ली गई।
- बरामद राशि: CBI ने 50 लाख रुपये की रिश्वत और अतिरिक्त 53.87 लाख रुपये नकद बरामद किए।
- जाब्ता: अचल संपत्ति से जुड़े दस्तावेज़ और अन्य महत्वपूर्ण कागजात।
रिश्वत का तरीका और जाल
CBI के अनुसार, अभियंता विक्रांत वर्मा ने वडाला में जमीन पर निर्माण परियोजना शुरू करने के लिए NOC जारी करने के बदले 1 करोड़ रुपये की रिश्वत की माँग की। बाद में यह रकम घटाकर 70 लाख रुपये कर दी गई। रिश्वत की प्राप्ति सौरज कुमार के माध्यम से हुई, जो 50 लाख रुपये को अरविंद सेमवाल से लेकर अभियंता को सौंपा। CBI ने 1 अक्टूबर को जाल बिछाया और सौरज कुमार को रंगे हाथों पकड़ लिया।
छापेमारी और बरामद वस्तुएँ
गिरफ्तारी के बाद CBI ने मुंबई, नवी मुंबई और पुणे में आरोपियों के ठिकानों पर छापेमारी की। इस दौरान 53.87 लाख रुपये नकद, 50 लाख रुपये की रिश्वत और अचल संपत्ति से जुड़े दस्तावेज़ बरामद हुए। सभी पांच आरोपियों को शुक्रवार को मुंबई की विशेष CBI अदालत में पेश किया जाएगा।
मुख्य बातें
- CBI ने वडाला में NOC के बदले रिश्वतखोरी के मामले में 5 लोगों को गिरफ्तार किया।
- रिश्वत की प्रारम्भिक माँग 1 करोड़ रुपये, बाद में 70 लाख रुपये तय।
- रिश्वत के रूप में 50 लाख रुपये सौरज कुमार के माध्यम से ली गई और बरामद हुई।
- छापेमारी में कुल 53.87 लाख रुपये नकद और महत्वपूर्ण दस्तावेज़ जब्त।
- सभी आरोपी शुक्रवार को विशेष CBI अदालत में पेश होंगे, आगे की जांच जारी।
यह मामला सार्वजनिक निर्माण कार्यों में पारदर्शिता और भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई का संकेत देता है। CBI ने बताया कि आगे की जांच में अतिरिक्त साक्ष्य और वित्तीय लेन‑देन की जाँच की जाएगी।




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