भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है जहाँ विभिन्न धर्म, भाषा और संस्कृति के लोग शांति से रहते हैं। ऐसे में किसी भी समुदाय या अल्पसंख्यक समूह की भावनाओं को ठेस पहुँचाना या अपमान करना कानून के तहत गंभीर अपराध माना जाता है।
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कानून क्या कहता है?
📌 IPC की धारा 295A
भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 295A यह अपराध बनाती है कि यदि कोई व्यक्ति किसी वर्ग के धार्मिक विश्वासों या भावनाओं को जानबूझकर अपमानित करता है, तो वह दंडनीय अपराध है।
दोषी को 3 साल तक की जेल, जुर्माना, या दोनों सज़ा मिल सकती है।
यह एक Cognizable (तलाशी योग्य), Non-Bailable (गैर-जमानती) अपराध है।
इस धारा के तहत अपमान तब अपराध माना जाता है जब वह जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण इरादे से किया जाता हो, न कि साधारण आलोचना।
क्या BNS में भी सजा है?
हाल के Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023 (BNS) के प्रावधानों के अनुसार, किसी व्यक्ति का जानबूझकर किसी को अपमानित करना और जिससे शांति भंग होने की आशंका हो, वह एक अपराध माना जाता है और इसके लिए 2 साल तक की सजा, जुर्माना या दोनों का प्रावधान है।
किस प्रकार के व्यवहार पर सज़ा लग सकती है?
ऐसे कृत्य जिनसे किसी धर्म, उसकी मान्यताओं या समुदाय की धार्मिक भावनाओं को औचित्यहीन रूप से ठेस पहुँचती हो — जैसे अपमानजनक बोल, लिखित बातें, संकेत या दृश्य प्रतिनिधित्व — के लिए यह कानून लागू किया जाता है।
महत्वपूर्ण बातें
✔️ सिर्फ आलोचना या वैचारिक बहस अपराध नहीं है।
✔️ इरादा — यानी जानबूझकर अपमान करना — दंड निर्धारण का अहम हिस्सा है।
✔️ कानून का उद्देश्य धार्मिक सौहार्द और सामाजिक शांति को बनाये रखना है।
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