जस्टिस उज्ज्वल भुइयां ने SIR पर उठाए गंभीर सवाल: 90 लाख वोटों की कटौती लोकतंत्र के लिए खतरा
2 मिनट में पढ़ें

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस उज्ज्वल भुइयां ने स्टैटिस्टिकल इंफॉर्मेशन रिपोर्ट (SIR) के दुरुपयोग को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में लगभग 90 लाख मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए जाने की रिपोर्ट एक गंभीर लोकतांत्रिक खतरा है।
सIR रिपोर्ट और 90 लाख वोटों की कटौती
एक रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिम बंगाल में लगभग 90 लाख मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं। जस्टिस भुइयां ने इस प्रक्रिया को “संविधान पर सीधा हमला” कहा। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि केवल इस कारण—कि मतदाता अपने दर्ज पते पर उपलब्ध नहीं है—उसके मताधिकार को समाप्त नहीं किया जा सकता।
जस्टिस भुइयां की मुख्य टिप्पणी
एक सार्वजनिक कार्यक्रम में बोलते हुए जस्टिस भुइयां ने कहा, “यदि कोई मतदाता अपने दर्ज पते पर उपलब्ध नहीं होता है, तो केवल इस आधार पर उसके मताधिकार को समाप्त नहीं किया जा सकता।” उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि मतदाता सूची में नाम हटाना लोकतांत्रिक प्रक्रिया के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है।
मुख्य बातें
- पश्चिम बंगाल में लगभग 90 लाख मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए।
- जस्टिस उज्ज्वल भुइयां ने इसे संविधान पर सीधा हमला कहा।
- मतदाता के पते की उपलब्धता के आधार पर मताधिकार समाप्त नहीं किया जा सकता।
- SIR (Statistical Information Report) की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए गए।
लोकतंत्र पर संभावित प्रभाव
भुइयां की चेतावनी इस बात की ओर इशारा करती है कि यदि मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाते हैं, तो चुनावी प्रक्रिया की वैधता और प्रतिनिधित्व पर प्रश्न उठते हैं। यह मुद्दा न केवल पश्चिम बंगाल बल्कि पूरे देश में चुनावी प्रबंधन के पारदर्शिता और जवाबदेही को चुनौती देता है।
आपके लिए संबंधित खबरें
आगे की कार्यवाही की अपेक्षा
जस्टिस भुइयां ने इस मुद्दे को उच्चतम न्यायालय में लाने की संभावना जताई है, जिससे SIR की प्रक्रिया की वैधता और चुनावी अधिकारों की सुरक्षा पर पुनर्विचार हो सके।
वर्तमान में इस विषय पर विभिन्न राजनीतिक दल और नागरिक समाज समूहों ने भी अपनी आवाज़ उठाई है, जो इस मुद्दे को न्यायिक और विधायी स्तर पर सुलझाने की मांग कर रहे हैं।




टिप्पणियाँ
0