यूरोप डेस्क | इंटरनेशनल न्यूजग्रीनलैंड को लेकर वैश्विक राजनीति में हलचल के बीच यूरोप की सात बड़ी ताकतों ने एकजुट होकर बेहद सख्त और स्पष्ट संदेश दिया है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़, इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी, पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क, स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज़, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर और डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिकसन ने 6 जनवरी 2026 को ग्रीनलैंड पर संयुक्त बयान (Joint Statement on Greenland) जारी किया।

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इस बयान में नेताओं ने दो टूक शब्दों में कहा कि ग्रीनलैंड अपने लोगों का है और इससे जुड़े किसी भी राजनीतिक, रणनीतिक या प्रशासनिक फैसले का अधिकार केवल डेनमार्क और ग्रीनलैंड को ही है। किसी भी बाहरी हस्तक्षेप को साफ तौर पर खारिज कर दिया गया है।

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आर्कटिक सुरक्षा यूरोप की प्राथमिकता

संयुक्त बयान में कहा गया कि आर्कटिक क्षेत्र की सुरक्षा यूरोप के लिए सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है और यह केवल क्षेत्रीय नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय और ट्रांस-अटलांटिक सुरक्षा से सीधे जुड़ा हुआ मुद्दा है। नेताओं ने माना कि आर्कटिक में बढ़ती गतिविधियां वैश्विक शक्ति संतुलन को प्रभावित कर रही हैं।

NATO के साथ सामूहिक सुरक्षा मॉडल

यूरोपीय नेताओं ने स्पष्ट किया कि आर्कटिक की सुरक्षा सामूहिक प्रयासों से ही संभव है, जिसमें NATO सहयोगी देशों की भूमिका निर्णायक होगी। बयान में कहा गया कि NATO पहले ही आर्कटिक को रणनीतिक प्राथमिकता घोषित कर चुका है और यूरोपीय देश वहां अपनी मौजूदगी, निवेश और गतिविधियां बढ़ा रहे हैं, ताकि किसी भी संभावित खतरे को रोका जा सके।

अमेरिका को बताया अहम साझेदार

इस संयुक्त बयान में संयुक्त राज्य अमेरिका को आर्कटिक सुरक्षा प्रयासों में अत्यंत आवश्यक साझेदार बताया गया है। खास तौर पर 1951 में डेनमार्क और अमेरिका के बीच हुए रक्षा समझौते का जिक्र करते हुए कहा गया कि यह सहयोग क्षेत्रीय स्थिरता की मजबूत नींव है।

UN चार्टर के सिद्धांतों पर कोई समझौता नहीं

यूरोपीय नेताओं ने यह भी दोहराया कि वे संयुक्त राष्ट्र चार्टर में निहित सिद्धांतों—संप्रभुता (Sovereignty), क्षेत्रीय अखंडता (Territorial Integrity) और सीमाओं की अवध्यता (Inviolability of Borders)—की रक्षा से पीछे नहीं हटेंगे। बयान में कहा गया कि ये सार्वभौमिक मूल्य हैं और इनकी रक्षा लगातार की जाती रहेगी।

क्यों अहम है यह बयान?

हाल के समय में ग्रीनलैंड और आर्कटिक क्षेत्र को लेकर वैश्विक स्तर पर रणनीतिक प्रतिस्पर्धा तेज हुई है। ऐसे में यूरोप का यह संयुक्त और मजबूत बयान यह संकेत देता है कि ग्रीनलैंड पर किसी भी तरह का दबाव या दखल स्वीकार नहीं किया जाएगा और यूरोप इस मुद्दे पर पूरी तरह एकजुट है।

GB NEWS INDIA | Category: दुनिया

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