दिल्ली हाईकोर्ट ने मेट्रो निर्माण में पेड़ कटाई पर DMRC‑DDA को सख्त नोटिस जारी
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दिल्ली हाईकोर्ट ने करोल बाग में मेट्रो निर्माण के लिए पेड़ काटने को लेकर दिल्ली सरकार, डीडीए (डेल्ही विकास प्राधिकरण) और डीएमआरसी (दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन) को सख्त नोटिस जारी किया। यह कार्रवाई पर्यावरण को होने वाले नुकसान को रोकने के उद्देश्य से याचिका पर सुनवाई के दौरान की गई।
केस की पृष्ठभूमि
अधिवक्ता अर्पित भार्गव ने करोल बाग के देशबंधु गुप्ता मार्ग पर स्थित अपने आवास के पीछे डीडीए की खाली जमीन पर डीएमआरसी द्वारा बड़े स्तर पर चल रहे मेट्रो निर्माण कार्य को लेकर याचिका दायर की। याचिकाकर्ता ने बताया कि इस स्थल पर कई पुराने और विशाल पेड़, विशेषकर पीपल के पेड़, मौजूद हैं, जिन्हें निर्माण कार्य के दौरान काटा या नुकसान पहुँचाया गया।
पर्यावरणीय प्रभाव
याचिकाकर्ता ने यह भी उजागर किया कि निर्माण स्थल पर मशीनों और अन्य उपकरणों की वजह से बड़ी मात्रा में धूल और बारीक कण हवा में फैल रहे हैं, जिससे आसपास के निवासियों के स्वास्थ्य पर असर पड़ रहा है। भूमिगत निर्माण के लिए दीवार बनाते समय भी कई पेड़ों को नुकसान पहुँचा गया।
हाईकोर्ट का रुख
हाईकोर्ट में न्यायमूर्ति जसमीत सिंह ने इस मुद्दे पर सुनवाई के दौरान पेड़ कटाई के आरोपों पर गहरी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा, “इस मामले में आंखें बंद नहीं कर सकते। मेट्रो निर्माण के लिए केवल उतने ही पेड़ों को हटाया जाना चाहिए, जितना बेहद जरूरी है।” कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पर्यावरण का नुकसान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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नोटिस और अगली सुनवाई
हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार, डीडीए और डीएमआरसी को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया। सभी पक्षों को अगली सुनवाई से पहले लिखित जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया गया। अगली सुनवाई 6 अक्टूबर को निर्धारित की गई है, जिसमें पक्षकारों को अपने-अपने तर्क प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा।
मुख्य बातें
- करोल बाग में मेट्रो निर्माण के दौरान कई पुराने पेड़, विशेषकर पीपल के पेड़, काटे या नुकसान पहुँचा।
- निर्माण स्थल से धूल और बारीक कणों के कारण पर्यावरणीय प्रदूषण बढ़ा।
- अधिवक्ता अर्पित भार्गव ने इस मुद्दे पर याचिका दायर की।
- हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार, डीडीए और डीएमआरसी को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया।
- न्यायमूर्ति जसमीत सिंह ने पेड़ कटाई पर कड़ी नाराजगी जताई और पर्यावरणीय नुकसान को बर्दाश्त नहीं करने का इशारा किया।
- अगली सुनवाई 6 अक्टूबर को तय।
हाईकोर्ट की इस कार्रवाई से यह स्पष्ट होता है कि शहरी विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी प्राथमिकता दी जानी चाहिए। आगे की सुनवाई में यह देखा जाएगा कि मेट्रो निर्माण के लिए आवश्यक पेड़ हटाने की सीमा कहाँ तक सीमित की जा सकती है और पर्यावरणीय क्षति को कैसे न्यूनतम किया जा सकता है।




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