मुंबई में ठाकरे बंधुओं का गर्जना मोर्चा: मतदाता सूची से हटाए गए करोड़ों नामों पर उठे सवाल
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मुंबई में उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे ने एक साथ गर्जना मोर्चा निकाला, जिसमें उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली के खिलाफ आवाज़ उठाई। यह प्रदर्शन शिवसेना (यूबीटी) और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के एकजुट प्रयास का हिस्सा था।
मोर्चे का मार्ग और मुख्य बिंदु
प्रदर्शनकारियों ने मेट्रो सिनेमा से बीएमसी मुख्यालय तक मार्च किया, जहाँ एक सभा का आयोजन किया गया। मोर्चे का प्रमुख मुद्दा “स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर)” प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची से करोड़ों मतदाताओं के नाम हटाए जाने को लेकर था। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि यह प्रक्रिया लोकतंत्र की बुनियादी नींव को कमजोर कर रही है।
मुख्य मांगें
- मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ इस्तीफे की मांग।
- एसआईआर प्रक्रिया में पारदर्शिता और न्यायसंगत पुनरावलोकन की आवश्यकता।
- मतदाता सूची से हटाए गए नामों की पुनः जाँच और पुनः प्रविष्टि।
मुख्य बातें
- उद्धव और राज ठाकरे ने एक साथ गर्जना मोर्चा निकाला।
- शिवसेना (यूबीटी) और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) ने एकजुट होकर प्रदर्शन किया।
- मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लोकतंत्र की हत्या का आरोप।
- एसआईआर प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची से करोड़ों नाम हटाए जाने को लेकर विरोध।
- आयुक्त के इस्तीफे की मांग और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली में सुधार की अपील।
प्रदर्शन की प्रतिक्रिया
मोर्चे में उपस्थित लोगों ने कहा कि मतदाता सूची से नाम हटाना केवल एक तकनीकी त्रुटि नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि चुनाव आयोग इस प्रक्रिया को बिना पारदर्शी जांच के जारी रखता है, तो भविष्य में चुनावी परिणामों की वैधता पर सवाल उठेंगे।
आगे की संभावनाएँ
इस मोर्चे के बाद, राजनीतिक दलों और नागरिक समाज के समूहों ने कहा कि वे इस मुद्दे को लेकर आगे भी दबाव बनाए रखेंगे। चुनाव आयोग के भीतर प्रक्रिया सुधार की मांगें बढ़ रही हैं, और इस पर केंद्र और राज्य स्तर पर चर्चा की संभावना है।




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