होरमुज संकट के बीच भारत का ऊर्जा सुरक्षा प्लान: UAE से अंडरसी तेल पाइपलाइन की तैयारी
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होरमुज जलडमरूमध्य में बढ़ते भू‑राजनीतिक तनाव ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा को गंभीर चुनौती में डाल दिया है। इस समुद्री मार्ग पर वैश्विक कच्चे तेल का लगभग 20 % से अधिक प्रवाह होता है, और भारत की आयातित तेल की बड़ी हिस्सेदारी इस मार्ग पर निर्भर है। इस जोखिम को कम करने के लिए सरकार ने वैकल्पिक आपूर्ति मार्ग की तलाश शुरू कर दी है।
ऊर्जा सुरक्षा के लिए वैकल्पिक मार्ग की आवश्यकता
होरमुज में किसी भी व्यवधान से भारत की तेल आयात में बाधा उत्पन्न हो सकती है, जिससे देश की आर्थिक स्थिरता और ऊर्जा कीमतों पर असर पड़ेगा। इस संदर्भ में केंद्रीय ऊर्जा मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि सरकार ओमान और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से भारत तक समुद्र के नीचे तेल‑गैस पाइपलाइन परियोजना को प्राथमिकता दे रही है।
MEIDP – मिडिल ईस्ट टू इंडिया डीपवॉटर पाइपलाइन
इस नई परियोजना को “मिडिल ईस्ट टू इंडिया डीपवॉटर पाइपलाइन” (MEIDP) कहा गया है। यह पाइपलाइन ओमान और UAE के तेल‑गैस क्षेत्रों को भारत के तटवर्ती टर्मिनलों से जोड़ने की योजना है। मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
- समुद्र के नीचे बिछाई जाएगी, जिससे समुद्री सुरक्षा जोखिम कम होगा।
- UAE और ओमान दोनों से समानांतर स्रोतों को जोड़ने से आपूर्ति में विविधता आएगी।
- परियोजना के तहत प्रारंभिक चरण में तकनीकी अध्ययन और संभाव्य मार्ग निर्धारण किया जाएगा।
परियोजना की वर्तमान स्थिति
पीयूष गोयल के बयान के बाद, दोनों देशों के प्रतिनिधियों ने इस पहल पर प्रारम्भिक समझौते की पुष्टि की। अभी तक वित्तीय मॉडल या पूर्ण समय‑सीमा सार्वजनिक नहीं हुई है, परन्तु सरकार ने इसे “ऊर्जा सुरक्षा के लिए रणनीतिक प्राथमिकता” कहा है।
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मुख्य बातें
- होरमुज जलडमरूमध्य में तनाव के कारण भारत को वैकल्पिक तेल आपूर्ति मार्ग की आवश्यकता महसूस हुई।
- भारत‑UAE (और ओमान) के बीच अंडरसी तेल‑गैस पाइपलाइन MEIDP पर चर्चा तेज़ हुई।
- परियोजना समुद्र के नीचे बिछाई जाएगी, जिससे समुद्री सुरक्षा जोखिम कम होगा।
- उद्देश्य कच्चे तेल की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करना और ऊर्जा कीमतों में स्थिरता लाना।
भविष्य की संभावनाएँ
यदि MEIDP सफलतापूर्वक लागू हो जाता है, तो भारत को मध्य‑पूर्व से तेल आयात में एक स्थिर, कम जोखिम वाला मार्ग मिलेगा। यह न केवल मौजूदा समुद्री मार्ग पर निर्भरता घटाएगा, बल्कि दीर्घकालिक ऊर्जा रणनीति में भी महत्वपूर्ण योगदान देगा। साथ ही, इस प्रकार की बुनियादी ढाँचा परियोजना भारत‑UAE आर्थिक सहयोग को और गहरा करेगी।
अभी के लिए सरकार ने इस दिशा में तकनीकी एवं आर्थिक अध्ययन को तेज़ करने का निर्देश दिया है, और आगे की जानकारी के साथ विस्तृत योजना सार्वजनिक की जाएगी।




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