मथुरा/वृंदावन:भक्ति के मार्ग पर चलने वाले अधिकांश लोगों की एक ही शिकायत होती है—“भजन करते समय मन टिकता क्यों नहीं?”इसी गहरे सवाल पर प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज ने ऐसा आध्यात्मिक रहस्य उजागर किया है, जो सच्ची भक्ति (True Devotion) को समझने की दिशा बदल सकता है।

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प्रेमानंद महाराज के अनुसार, आज के समय में भक्ति को अक्सर सुविधाओं और बाहरी व्यवस्थाओं से जोड़ दिया गया है। शांत कमरा, अच्छा भोजन, आरामदायक आसन—इन सबको लोग भजन की अनिवार्य शर्त मान लेते हैं। लेकिन यही सोच मन को भटकाने का सबसे बड़ा कारण बन जाती है।

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True Devotion क्या है?

महाराज बताते हैं कि सच्ची भक्ति (True Devotion) वह है, जिसमें मन पूरी तरह ईश्वर में लीन हो जाए—चाहे परिस्थिति अनुकूल हो या प्रतिकूल।

जब व्यक्ति असुविधा में भी नाम-स्मरण करता है, तभी Focus in Bhajan अपने आप गहरा होने लगता है।

Comfort Zone बन जाता है बाधा

प्रेमानंद महाराज के अनुसार, अधिक सुविधा मन में Ego और Distraction पैदा करती है।

जब सब कुछ आरामदायक होता है, तब मन भगवान से अधिक अपने सुख पर टिक जाता है।यही वजह है कि कई बार भजन करते हुए भी Inner Peace महसूस नहीं होती।

महाराज यह भी कहते हैं कि ईश्वर को भव्य भोग या दिखावा नहीं चाहिए।Bhakti, Surrender और Pure Emotion—यही भगवान को प्रिय है।अगर मन सच्चे भाव से जुड़ा हो, तो साधारण भजन भी आत्मा को ईश्वर से जोड़ देता है।

जब जीवन में कठिनाइयाँ आती हैं और उसी समय व्यक्ति ईश्वर का स्मरण करता है,तो वही क्षण Spiritual Growth का सबसे बड़ा अवसर बन जाता है।ऐसे भजन में मन नहीं भटकता, क्योंकि वहाँ केवल ईश्वर और भक्त का संबंध होता है।

अब सवाल यह नहीं किभजन कहाँ किया जाए या कैसे किया जाए—सवाल यह है किक्या भजन करते समय हमारा मन वास्तव में भगवान के पास है?

यही प्रेमानंद महाराज का संदेश है—

सुविधा नहीं, समर्पण ही सच्ची भक्ति की पहचान है।

GB NEWS INDIA | Category: Lifestyle

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