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बैंकिंग सेक्टर में बढ़ते NPA का खतरा: निजी बैंकों पर बढ़ेगा दबाव

3 मिनट में पढ़ें

By Kishan kumar Jain• प्रकाशित 28 Oct 2026• अपडेट 28 Oct 2026
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बैंकिंग सेक्टर में बढ़ते NPA का खतरा: निजी बैंकों पर बढ़ेगा दबाव
इक्रा की रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2026‑27 में निजी बैंकों में नए बैड लोन की दर 2.5% तक पहुंच सकती है, जिससे 1.3 लाख करोड़ रुपए का NPA बन सकता है।…

इक्रा की नवीनतम रिपोर्ट ने चेतावनी दी है कि चालू वित्त वर्ष में भारतीय बैंकिंग सेक्टर में बैड लोन (NPA) की संख्या बढ़ सकती है, विशेषकर निजी बैंकों में। असुरक्षित रिटेल और MSME लोन के कारण निजी बैंकों पर अधिक दबाव रहेगा, जबकि सरकारी बैंकों में अपेक्षाकृत कम जोखिम दिख रहा है।

निजी और सरकारी बैंकों में NPA का अनुमानित स्तर

रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2026‑27 में सरकारी बैंकों के लिए नए NPA की दर 0.8% और निजी बैंकों के लिए 2.5% रहने की संभावना है। राशि के हिसाब से, सरकारी बैंकों में नए NPA लगभग एक लाख करोड़ रुपए, जबकि निजी बैंकों में 1.3 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच सकते हैं। यह अंतर निजी बैंकों के कुल कर्ज में बिना गारंटी वाले रिटेल और MSME ऋणों की अधिक हिस्सेदारी को दर्शाता है।

ग्रॉस और शुद्ध NPA अनुपात

इक्रा ने अनुमान लगाया है कि मार्च 2027 तक ग्रॉस NPA अनुपात 1.7‑1.8% तक बढ़ सकता है, जबकि शुद्ध NPA अनुपात 0.4‑0.5% के बीच रहेगा। यह वृद्धि जून 2026 के 1.7% (ग्रॉस) और 0.4% (शुद्ध) के स्तर से थोड़ा ऊपर है।

बैंक ऋण वृद्धि और संभावित जोखिम

वित्त वर्ष 2026‑27 में बैंक ऋण वृद्धि 15.1‑15.9% रहने की उम्मीद है, जिससे 32.3‑33.8 लाख करोड़ रुपए का अतिरिक्त ऋण वितरित हो सकता है। हालांकि, भू‑राजनीतिक जोखिम और महंगाई का दबाव इस वृद्धि को चुनौती दे सकता है। बैंकों को उपलब्ध नकदी का उपयोग करने के बाद घरेलू जमा में मजबूत वृद्धि बनाए रखना भी आवश्यक होगा।

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ब्याज मार्जिन और एनबीएफसी की स्थिति

ब्याज दरों के चक्र में बदलाव से बैंकों के शुद्ध ब्याज मार्जिन में सुधार की संभावना है। कर्ज पर ब्याज दरें जमा पर ब्याज दरों की तुलना में तेज़ी से बदल सकती हैं, जिससे मार्जिन में सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

इक्रा ने यह भी बताया कि गैर‑बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFC) की प्रबंधन‑अधीन परिसंपत्तियां वित्त वर्ष 2026‑27 में 15‑17% और 2027‑28 में 14‑16% बढ़ सकती हैं। हालांकि, NBFC की उधारी लागत में 0.10‑0.20% की वृद्धि की आशंका है। इन संस्थाओं को पुनर्वित्त और नई उधारी के लिए इस वर्ष 6.9‑7.1 लाख करोड़ रुपए की अतिरिक्त आवश्यकता होगी।

मुख्य बातें

  • वित्त वर्ष 2026‑27 में निजी बैंकों में NPA दर 2.5% तक पहुंच सकती है।
  • निजी बैंकों में नए NPA का अनुमानित मूल्य 1.3 लाख करोड़ रुपए।
  • सरकारी बैंकों में नई NPA दर 0.8% और मूल्य 1 लाख करोड़ रुपए।
  • ग्रॉस NPA अनुपात मार्च 2027 तक 1.7‑1.8% और शुद्ध NPA 0.4‑0.5% रहने की संभावना।
  • बैंक ऋण वृद्धि 15.1‑15.9% के बीच, अतिरिक्त 32‑34 लाख करोड़ रुपए का ऋण वितरण।
  • ब्याज मार्जिन में सुधार की संभावना, जबकि भू‑राजनीतिक और महंगाई जोखिम चुनौतियां पेश करेंगे।
  • NBFC की परिसंपत्तियां 15‑17% बढ़ेंगी, लेकिन उधारी लागत 0.10‑0.20% बढ़ेगी।

इन आँकड़ों के आधार पर, निजी बैंकों को अपने रिटेल और MSME पोर्टफोलियो में जोखिम प्रबंधन को सुदृढ़ करने की आवश्यकता होगी, जबकि सरकारी बैंकों को अपनी लोन गुणवत्ता को बनाए रखने पर ध्यान देना होगा।

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