ढाका:बांग्लादेश में धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा को लेकर एक बार फिर गंभीर चिंताएं सामने आई हैं। बीते 15 दिनों में चौथे हिंदू नागरिक की मौत की खबर ने देश-विदेश में हलचल मचा दी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, हालिया मामला उस समय सामने आया जब पीड़ित पर धारदार हथियारों से हमला किया गया और बाद में उसे आग के हवाले कर दिया गया। गंभीर रूप से घायल अवस्था में उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, इससे पहले भी इसी अवधि में तीन अन्य हिंदू नागरिकों की हिंसक घटनाओं में जान जा चुकी है। इन घटनाओं को लेकर आरोप है कि कुछ मामलों में पीड़ितों को निशाना बनाकर पेट्रोल डालकर जलाया गया, जिससे उनकी हालत और बिगड़ गई। इन घटनाओं ने बांग्लादेश में धार्मिक सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
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अस्पताल में इलाज के दौरान मौत
ताजा मामले में पीड़ित को गंभीर अवस्था में अस्पताल लाया गया था, लेकिन इलाज के दौरान उसकी जान नहीं बचाई जा सकी। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि हमला बेहद क्रूर था और पीड़ित को जानबूझकर नुकसान पहुंचाने की मंशा साफ दिखाई देती है।
प्रशासन की भूमिका पर सवाल
लगातार सामने आ रही इन घटनाओं के बाद स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों की भूमिका पर सवाल उठने लगे हैं। मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि यदि समय रहते सख्त कार्रवाई और सुरक्षा व्यवस्था की जाती, तो ऐसी घटनाओं को रोका जा सकता था।
अंतरराष्ट्रीय चिंता
विश्लेषकों के अनुसार, यह मुद्दा अब केवल आंतरिक कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं रहा है। धार्मिक स्वतंत्रता, अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और मानवाधिकार जैसे विषयों पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बांग्लादेश को कठघरे में खड़ा किया जा सकता है।
फिलहाल प्रशासन की ओर से जांच और कार्रवाई के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन पीड़ित समुदाय में डर और असुरक्षा का माहौल बना हुआ है।
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