ढाका:बांग्लादेश में वर्ष 2026 की सरकारी छुट्टियों की सूची को लेकर सियासी और सामाजिक विवाद गहराता जा रहा है। अंतरिम यूनुस सरकार द्वारा जारी अवकाश सूची में सरस्वती पूजा, जन्माष्टमी जैसे प्रमुख हिंदू त्योहारों के साथ-साथ भाषा शहीद दिवस को शामिल न किए जाने पर तीखी प्रतिक्रिया सामने आ रही है। आलोचकों का आरोप है कि यह कदम न केवल अल्पसंख्यक समुदायों की उपेक्षा करता है, बल्कि बांग्लादेश के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक मूल्यों को भी कमजोर करता है।
छुट्टी सूची सामने आते ही देश के विभिन्न हिस्सों से हिंदू संगठनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और बुद्धिजीवियों ने विरोध जताया। उनका कहना है कि जिन त्योहारों और ऐतिहासिक दिनों को दशकों से राष्ट्रीय पहचान का हिस्सा माना जाता रहा है, उन्हें अचानक हटाना धार्मिक स्वतंत्रता पर सवाल खड़े करता है।
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सरकार की सफाई और सवाल
यूनुस सरकार की ओर से सफाई देते हुए कहा गया है कि छुट्टी सूची को प्रशासनिक और व्यावहारिक आधार पर तैयार किया गया है। हालांकि, सरकार की इस दलील से असंतोष कम नहीं हुआ है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि अगर यह केवल प्रशासनिक फैसला होता, तो सभी समुदायों के प्रमुख त्योहारों के साथ समान व्यवहार किया जाता।
क्यों अहम है यह विवाद?
विशेषज्ञों के मुताबिक, यह मामला केवल छुट्टियों तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे जुड़े सवाल धार्मिक अधिकारों, अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और राष्ट्रीय पहचान से जुड़े हैं। आने वाले दिनों में यह मुद्दा बांग्लादेश की राजनीति और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी चर्चा का विषय बन सकता है।
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