इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ध्वनि प्रदूषण रोकने के लिए साइलेंस व आवासीय जोन की अधिसूचना का आदेश दिया
2 मिनट में पढ़ें

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने उत्तर प्रदेश में बढ़ते ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए राज्य सरकार को एक निर्णायक निर्देश जारी किया। अदालत ने सरकार को तीन महीने के भीतर विभिन्न क्षेत्रों को साइलेंस, आवासीय, औद्योगिक और व्यावसायिक ज़ोन में वर्गीकृत कर अधिसूचित करने का आदेश दिया।
निर्देशों का मुख्य बिंदु
- सरकार को तीन महीने के भीतर सभी ज़ोन की स्पष्ट पहचान करनी होगी।
- ध्वनि प्रदूषण (विनियमन और नियंत्रण) नियम, 2000 के मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करना अनिवार्य है।
- अधिसूचित ज़ोन के आधार पर स्थानीय प्रशासन को रोकथाम एवं प्रवर्तन उपाय लागू करने होंगे।
- अगली सुनवाई 15 जनवरी 2027 को निर्धारित की गई है।
जस्टिस आलोक माथुर और जस्टिस अमिताभ कुमार राय की खंडपीठ
जस्टिस आलोक माथुर और जस्टिस अमिताभ कुमार राय की खंडपीठ ने ध्वनि प्रदूषण से जुड़ी एक स्वतः संज्ञान जनहित याचिका पर सुनवाई की। इस याचिका में नागरिकों ने ध्वनि प्रदूषण के बढ़ते स्तर और उसके स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों को उजागर किया था। खंडपीठ ने इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए उपरोक्त निर्देश जारी किए।
ध्वनि प्रदूषण नियम 2000 की प्रमुख धाराएँ
ध्वनि प्रदूषण (विनियमन और नियंत्रण) नियम, 2000 के तहत विभिन्न क्षेत्रों के लिए अलग-अलग ध्वनि सीमा निर्धारित की गई है। इन मानकों का उल्लंघन करने पर जुर्माना और अन्य दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है। कोर्ट ने इस नियम के कड़ाई से पालन को सुनिश्चित करने के लिए ज़ोन‑वार वर्गीकरण को अनिवार्य बताया।
प्रभाव और आगे की कार्यवाही
निर्देशों के लागू होने से अपेक्षा है कि शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में ध्वनि स्तर में कमी आएगी। स्थानीय प्रशासन को अधिसूचित ज़ोन के अनुसार प्रतिबंधात्मक उपाय, जैसे कि हूटर्स पर रोक, शोर उत्पन्न करने वाले उद्योगों की निगरानी, और आवासीय क्षेत्रों में शोर नियंत्रण के लिए विशेष नियम लागू करने होंगे।
आपके लिए संबंधित खबरें
अगली सुनवाई 15 जनवरी 2027 को निर्धारित है, जिसमें सरकार को अपने कार्यान्वयन की रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। यदि निर्देशों का पालन नहीं किया गया तो अदालत अतिरिक्त उपायों का आदेश दे सकती है।




टिप्पणियाँ
0