नई दिल्ली: भारत में केंद्रीय कर्मचारियों के लिए 8वीं वेतन आयोग (8th Pay Commission) की सिफ़ारिशों से जुड़े वेतन भुगतान के क्रियान्वयन में हुई देरी के कारण भविष्य में HRA (हाउस रेंट अलाउंस) पर बड़ा प्रभाव पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसका कार्यान्वयन समय पर नहीं हुआ तो कर्मचारियों को HRA का नुकसान उठाना पड़ सकता है।
क्या है पूरा मामला?8वीं वेतन आयोग की रिपोर्ट को लागू करने की प्रक्रिया सरकार के विभिन्न विभागों और वित्त मंत्रालय में लंबित रही है। इस देरी के कारण अगले वेतन चक्र में भाड़ा भत्ता (HRA) के नए स्लैबों को लागू करने में भी परेशानी आ सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, वेतन आयोग की सिफ़ारिशों के अनुसार HRA दरें यदि समय पर लागू नहीं की जाती हैं, तो कर्मचारियों को कम HRA का लाभ मिलेगा और यह महँगाई व किराये के संरक्षण में कमी का कारण बन सकता है।
सरकारी कर्मचारियों पर असर
इस देरी का असर सबसे ज़्यादा केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों और सशस्त्र बलों के परिवारों पर पड़ेगा, क्योंकि उनकी संख्या में HRA का महत्त्व बढ़ता जा रहा है। अगर नई स्लैबें लागू नहीं होतीं, तो उन्हें भूतपूर्व HRA के तहत ही भत्ता मिलेगा, जिससे किराया महँगाई के मुकाबले नुकसान हो सकता है।
यदि जल्द सुधार न हुआ, तो HRA में नुकसान को लेकर सरोकारों और संगठनों द्वारा सरकार से मांग की जा सकती है।
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