विजयादशमी पर मोहन भागवत का संदेश: नई पीढ़ी को नशे से दूर रहने की अपील
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महाराष्ट्र के नागपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने इस वर्ष भी विजयादशमी का भव्य उत्सव आयोजित किया। शस्त्र पूजन के बाद सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने उपस्थित लोगों को संबोधित किया और आज के समय में देश को किस प्रकार के सामाजिक और नैतिक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, इस पर प्रकाश डाला।
विजयादशमी के अवसर पर मुख्य संदेश
डॉ. भागवत ने कहा कि स्वतंत्रता के लिए हमारे पूर्वजों ने जो तपस्या और समर्पण किया, उससे कहीं अधिक की आवश्यकता अब है। उन्होंने बताया कि नई पीढ़ी कई माध्यमों से जानकारी ग्रहण करती है, परन्तु विवेक के अभाव में वह अनुचित सामग्री को भी स्वीकार कर लेती है। इस प्रवृत्ति के दुष्परिणामों को देखते हुए कई देशों ने अनुशासनात्मक उपाय अपनाए हैं, और भारत में भी OTT (ऑनलाइन टेलीविज़न) प्लेटफ़ॉर्म के संदर्भ में समान कदम उठाने की आवश्यकता है।
OTT कंटेंट का चयन और विवेक
आरएसएस प्रमुख ने कहा कि यदि हमारे संस्कारों की बात हो तो नई पीढ़ी को यह सिखाना आवश्यक है कि कैसे सही सामग्री का चयन किया जाए। विवेक की कमी से व्यक्तिगत, पारिवारिक और सामाजिक जीवन में विभिन्न नकारात्मक प्रभाव देखे जा रहे हैं।
नशीली दवाओं की बढ़ती समस्या
विवेक की कमी के कारण नशीली दवाओं की समस्या भी गंभीर रूप से उभरी है। डॉ. भागवत ने कहा कि नशीली दवाएं घातक हैं, परन्तु उनकी लत लगने से यह राष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ी समस्या बन गई है। उन्होंने सरकार, प्रशासन और अभिभावकों से अपील की कि वे इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार करें और नई पीढ़ी को नशे से दूर रहने की आदत विकसित करने में मदद करें।
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विज्ञान, तकनीकी और सामाजिक जिम्मेदारी
डॉ. भागवत ने यह भी रेखांकित किया कि विज्ञान और तकनीकी की प्रगति ने मानव जीवन को भौतिक रूप से सुखी बनाया है, परन्तु इसे केवल उपभोगवादी दृष्टिकोण से नहीं देखना चाहिए। तकनीकी केवल एक साधन है; यदि इसका उपयोग अनुचित रूप से किया जाए तो सामाजिक हानि अपरिहार्य हो जाती है।
सरकार की भूमिका
उपरोक्त चुनौतियों को देखते हुए उन्होंने कहा कि शासन एवं प्रशासन को OTT कंटेंट के नियमन, नशा मुक्ति कार्यक्रमों के सुदृढ़ीकरण और युवा वर्ग में सकारात्मक संस्कारों के प्रसार पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
मुख्य बातें
- विजयादशमी के अवसर पर आरएसएस ने नागपुर में उत्सव आयोजित किया।
- डॉ. मोहन भागवत ने नई पीढ़ी को नशे से दूर रहने की अपील की।
- OTT प्लेटफ़ॉर्म की सामग्री चयन में विवेक की आवश्यकता पर बल दिया गया।
- नशीली दवाओं की लत को राष्ट्रीय समस्या बताया और सरकार व अभिभावकों से कार्रवाई की मांग की।li>
- विज्ञान‑तकनीकी को केवल साधन मानते हुए सामाजिक जिम्मेदारी पर जोर दिया गया।
डॉ. भागवत ने अंत में कहा कि राष्ट्र की प्रगति के लिए केवल आर्थिक विकास ही नहीं, बल्कि नैतिक और सांस्कृतिक विकास भी आवश्यक है। इस दिशा में सभी वर्गों को मिलकर काम करना होगा।




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