उत्तर प्रदेश में 15 IAS अधिकारियों के तबादले, केजीएमयू की कुलसचिव अर्चना गहरवार को हटाया गया
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उत्तर प्रदेश सरकार ने एक बार फिर 15 आईएएस अधिकारियों के तबादले किए हैं, जिसमें केजीएमयू (किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय) की कुलसचिव अर्चना गहरवार का नाम प्रमुख है। नर्सिंग छात्रों के लगातार आंदोलन के बाद उन्हें हटाकर डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय (एकेटीयू) की कुलसचिव के रूप में नियुक्त किया गया।
केजीएमयू से एकेटीयू तक: अर्चना गहरवार का नया पद
केजीएमयू में नर्सिंग छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल रखा था। इस दबाव के मद्देनज़र, राज्य सरकार ने अर्चना गहरवार को केजीएमयू से हटाकर एकेटीयू की कुलसचिव बनाया। उनके स्थान पर एकेटीयू की पूर्व कुलसचिव रीना सिंह को केजीएमयू की कुलसचिव नियुक्त किया गया।
पंचायती राज विभाग में बदलाव
पंचायती राज विभाग में भी बड़ा बदलाव हुआ। निदेशक अमित कुमार सिंह को हटाकर उन्हें प्रबंध निदेशक पीसीडीएफ (पंचायती राज विभाग फंड) की जिम्मेदारी दी गई। उनकी जगह श्रीहरि प्रताप शाही को नया निदेशक बनाया गया। अमित कुमार सिंह के साथ पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर के बीच विवाद चल रहा था, जिसके बाद यह कदम उठाया गया।
अन्य प्रमुख तबादले
तबादले की सूची में कई अन्य उच्च पदस्थ अधिकारी शामिल हैं:
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- डा. उज्जवल कुमार को विशेष सचिव एवं निदेशक, भूतत्व एवं खनिकर्म का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया। वे पहले प्रबंध निदेशक, उत्तर प्रदेश मेडिकल सप्लाई कार्पोरेशन थे।
- श्रीमती जे. रीभा को मेडिकल सप्लाई कार्पोरेशन की प्रबंध निदेशक के रूप में नियुक्त किया गया।
- अन्य कई अपर आयुक्त, विकास अधिकारी, विशेष सचिव और प्रबंध निदेशक स्तर के अधिकारी भी इस पुनर्संरचना में शामिल हुए।
मुख्य बातें
- कुल 15 IAS अधिकारियों के तबादले हुए।
- केजीएमयू की कुलसचिव अर्चना गहरवार को नर्सिंग छात्रों के आंदोलन के बाद एकेटीयू भेजा गया।
- एकेटीयू की कुलसचिव रीना सिंह को केजीएमयू की कुलसचिव बनाया गया।
- पंचायती राज विभाग में निदेशक अमित कुमार सिंह को हटाकर श्रीहरि प्रताप शाही को नियुक्त किया गया।
- डा. उज्जवल कुमार को विशेष सचिव एवं निदेशक, भूतत्व एवं खनिकर्म का अतिरिक्त प्रभार मिला।
- श्रीमती जे. रीभा को मेडिकल सप्लाई कार्पोरेशन की प्रबंध निदेशक बनाया गया।
इन बदलावों से राज्य प्रशासन में नई दिशा और प्रबंधन की उम्मीद की जा रही है, विशेषकर शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्रों में चल रहे संघर्षों के संदर्भ में।




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