UP चुनाव 2027: काजू‑किशमिश पर अखिलेश यादव और ब्रजेश पाठक की सोशल‑मीडिया जंग
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उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारी तेज़ी से चल रही है। इस दौरान दो प्रमुख राजनेताओं – समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और उत्तर प्रदेश के डिप्टी मुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक – के बीच काजू‑किशमिश को लेकर सोशल‑मीडिया पर तीखा टकराव हुआ। दोनों ने एक‑दूसरे के वीडियो पोस्ट कर तंज़ बाज़ी की, जिससे चुनावी माहौल में ‘काजू‑किशमिश’ की नई चर्चा जुड़ गई।
अखिलेश यादव की तंज‑भरी पोस्ट
गुरुवार, 1 अक्टूबर 2026 को अखिलेश यादव ने ट्विटर पर एक वीडियो शेयर किया, जिसमें डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक हेलिकॉप्टर में बैठे दिख रहे थे। वीडियो में पाठक के बगल में एक टेबल पर काजू‑मखाना रखा था। यादव ने इस दृश्य पर टिप्पणी की: “मुखिया हैं बेसुध‑बेकाबू, आजू‑बाजू खा रहे काजू!” यह टिप्पणी उनके सहयोगियों के साथ बैठकर काजू‑किशमिश खाने की तस्वीर को लेकर थी।
ब्रजेश पाठक का जवाबी पलटवार
भारी प्रतिक्रिया के बाद ब्रजेश पाठक ने अगले दिन, 2 अक्टूबर 2026 को, एक नया वीडियो पोस्ट किया। इस वीडियो में पाठक ने अखिलेश यादव के सहयोगी नेताओं के साथ एक मेज पर काजू, किशमिश, बादाम और मिठाई के प्लेट रखे दिखाए। पाठक ने इस दृश्य को देखकर तंज़ किया: “वाह क्या ठाठ हैं, मेज पर काजू, किशमिश, बादाम और व्यंजनों की भरमार है, राजसी ठाठ का भोज है…” उन्होंने आगे कहा कि सियासत में दिखावा सादा हो तो क्या हुआ, असली थाली में पकवान होना चाहिए।
राजनीतिक संदर्भ
यह टकराव केवल व्यक्तिगत तंज़ नहीं, बल्कि आगामी 2027 के विधानसभा चुनाव की पृष्ठभूमि में एक रणनीतिक कदम माना जा रहा है। अखिलेश यादव समाजवादी पार्टी (एसपी) के प्रमुख नेता हैं, जबकि ब्रजेश पाठक भाजपा सरकार में डिप्टी सीएम के रूप में कार्यरत हैं। दोनों पार्टियों के बीच चुनावी रणनीति, गठबंधन और वोट बैंक को लेकर पहले से ही तीव्र प्रतिस्पर्धा चल रही है। काजू‑किशमिश को लेकर इस तरह की सार्वजनिक बहस से दोनों पक्ष अपने समर्थकों को आकर्षित करने और विरोधियों को आलोचना का अवसर बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
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मुख्य बातें
- अखिलेश यादव ने 1 अक्टूबर 2026 को ब्रजेश पाठक के हेलिकॉप्टर में काजू‑मखाना दिखाते हुए तंज़ किया।
- ब्रजेश पाठक ने 2 अक्टूबर 2026 को जवाबी वीडियो में काजू, किशमिश, बादाम की भरमार दिखाते हुए यादव पर तंज़ किया।
- दोनों नेताओं की पोस्टें सोशल‑मीडिया पर व्यापक चर्चा का कारण बनीं, जिससे चुनावी माहौल में ‘काजू‑किशमिश’ शब्द जुड़ गया।
- यह टकराव 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच हुआ, जहाँ एसपी और भाजपा दोनों ही वोट बैंक को मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं।
भविष्य की संभावनाएँ
जैसे-जैसे चुनावी तारीख नज़दीक आती है, इस तरह की सार्वजनिक तंज़‑बाज़ी और सोशल‑मीडिया पर बहसें बढ़ती रहेंगी। दोनों पक्षों के लिए यह एक अवसर है कि वे अपने समर्थकों को आकर्षित करने के साथ-साथ विरोधियों की छवि को कमजोर कर सकें। काजू‑किशमिश जैसी हल्की‑फुल्की बहसें अक्सर बड़े मुद्दों के बीच ध्यान आकर्षित करने का साधन बनती हैं।
अंत में यह कहा जा सकता है कि इस टकराव ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नया रंग भर दिया है, जहाँ छोटे‑छोटे संकेत भी बड़े चुनावी रणनीति का हिस्सा बन सकते हैं।




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