ट्रंप ने रूस पर लगाए प्रतिबंधों में छूट दी, भारत को मिली संभावित राहत
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस से जुड़े कई प्रतिबंधों, पाबंदियों और टैरिफ में छूट देने का आदेश जारी किया। यह निर्णय उन देशों के लिए महत्वपूर्ण है जो रूस से तेल और गैस आयात करते हैं, जिनमें भारत भी शामिल है।
कानून की पृष्ठभूमि
सितंबर 2023 में ट्रंप ने ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026’ पर हस्ताक्षर किए थे। इस कानून के तहत रूस से कच्चा तेल या गैस खरीदने वाले पाँच सबसे बड़े देशों पर अमेरिकी सामान पर 30 दिनों के भीतर 100% तक टैरिफ लगाने की व्यवस्था थी। यह टैरिफ उन देशों पर भी लागू हो सकता था जो कानून के लागू होने के 30 दिन बाद भी रूस से तेल या गैस खरीदते रहे।
छूट का विवरण
व्हाइट हाउस के एक आदेश में ट्रंप ने बताया कि उन्होंने अमेरिकी संसद को सूचित किया है कि इस समय छूट देना अमेरिका के राष्ट्रीय हित में है। उपलब्ध बयान में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि किन-किन प्रतिबंधों और टैरिफ को छूट दी गई है, पर यह स्पष्ट है कि कई आर्थिक दबावों को प्रभावी होने से पहले ही रद्द कर दिया गया है।
भारत की स्थिति
भारत विश्व में रूस से तेल आयात करने वाले प्रमुख देशों में से एक है। यदि टैरिफ लागू होते, तो अमेरिकी बाजार में भारत के निर्यात पर 100% तक का शुल्क लग सकता था, जिससे भारतीय कंपनियों के लिए आर्थिक दबाव बढ़ जाता। ट्रंप की इस छूट से भारत को संभावित रूप से राहत मिल सकती है, हालांकि वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि किन-किन प्रतिबंधों को हटाया गया है।
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अन्य देशों की प्रतिक्रिया
रूस से तेल खरीदने वाले प्रमुख देशों में चीन, अज़रबैजान, हंगरी और स्लोवाकिया भी शामिल हैं। इन देशों ने भी इस कानून को लेकर चिंता व्यक्त की थी। ट्रंप की छूट से इन देशों को भी संभावित आर्थिक लाभ मिल सकता है।
मुख्य बातें
- ट्रंप ने ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026’ के तहत लागू होने वाले कई प्रतिबंधों और टैरिफ में छूट दी।
- छूट का उद्देश्य अमेरिकी राष्ट्रीय हित को सुरक्षित करना बताया गया।
- भारत सहित कई देशों ने इस कानून के कारण संभावित 100% टैरिफ के बारे में चिंता जताई थी।
- छूट से भारत को अमेरिकी बाजार में निर्यात पर संभावित शुल्क से राहत मिल सकती है।
- छूट के विशिष्ट प्रतिबंधों की सूची सार्वजनिक नहीं की गई।
आगे की संभावनाएँ
ट्रंप की इस नीति परिवर्तन से अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में नई गतिशीलता आ सकती है। यदि रूस से तेल आयात करने वाले देशों को टैरिफ नहीं लगते, तो अमेरिकी कंपनियों के साथ व्यापार में प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है। साथ ही, यूक्रेन के प्रति ट्रंप के आलोचनात्मक रुख और नई नेतृत्व की मांग भी इस नीति के व्यापक भू-राजनीतिक संदर्भ को दर्शाती है।




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