शारदीय नवरात्रि 2026 में कन्या पूजन: कितनी कन्याओं को भोजन कराना उचित?
3 मिनट में पढ़ें

शारदीय नवरात्रि 2026 का आरम्भ 11 अक्टूबर, रविवार से होगा और 19 अक्टूबर को समाप्त होगा। इस पावन अवधि में अष्टमी और नवमी के दिन मातृ देवी दुर्गा के पूजन के साथ कन्या पूजन की परम्परा भी निभाई जाती है। कई घरों में इस पूजन को लेकर यह सवाल उठता है – कितनी कन्याओं को भोजन कराना चाहिए? क्या 9 कन्याएँ ही अनिवार्य हैं या 2, 5, 7 या यहाँ तक कि एक भी पर्याप्त है?
कन्या पूजन में 9 कन्याएँ क्यों प्रमुख हैं?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नौ कन्याएँ मातृ दुर्गा के नौ रूपों – नवदुर्गा – का प्रतीक मानी जाती हैं। इसलिए 9 कन्याओं को भोजन कराना सबसे प्रमुख और शुभ माना जाता है। कई परिवारों में नौ कन्याओं के साथ एक बालक को भी भोजन कराया जाता है, जिसे लांगुरिया या भैरव का स्वरूप माना जाता है।
कम संख्या में पूजन की वैधता
व्यावहारिक कारणों से सभी घरों में एक साथ 9 कन्याओं को बुलाना संभव नहीं होता। परम्परा के अनुसार 2, 3, 5, 7 या यहाँ तक कि एक ही कन्या को भी श्रद्धा के साथ पूजन किया जा सकता है। संख्या कम होने से पूजन अधूरा नहीं माना जाता; मुख्य बात श्रद्धा और सम्मान है।
कन्या पूजन के लिए आयु सीमा
परम्परागत रूप से 2 से 9 वर्ष की बच्चियों को कन्या पूजन के लिए उपयुक्त माना जाता है। कुछ क्षेत्रों में 10 वर्ष से कम उम्र की बच्चियों को भी कुमारी पूजा में शामिल किया जाता है। इस आयु सीमा का उद्देश्य यह है कि छोटी बच्चियाँ शुद्धता और नारीत्व का प्रतीक हों।
आपके लिए संबंधित खबरें
कन्या पूजन की विधि
- पूजन से पहले घर की पूरी सफ़ाई करें और पूजा स्थल तैयार रखें।
- कन्याओं को सम्मानपूर्वक घर बुलाएँ; उनके आने पर पैर धोएँ और बैठने के लिये साफ़ आसन प्रदान करें।
- माथे पर रोली या कुमकुम का तिलक लगाएँ।
- पूजन के बाद पारम्परिक व्यंजन जैसे पूरी, काले चने, हलवा आदि का भोजन कराएँ।
- भोजन के बाद दक्षिणा, फल, मिठाई, वस्त्र या उपयोगी उपहार दे सकते हैं।
- यदि संभव हो तो एक बालक को भी भोजन कराएँ, जिसे लांगुरिया/भैरव माना जाता है।
मुख्य बातें
- शारदीय नवरात्रि 2026: 11‑19 अक्टूबर
- कन्या पूजन में 9 कन्याएँ सबसे प्रमुख, पर 2‑7‑5‑1 भी स्वीकार्य
- आयु सीमा: सामान्यतः 2‑9 वर्ष (कुछ परम्पराओं में 10 वर्ष से कम)
- पूजन की मुख्य विधि: सफ़ाई, पैर धोना, तिलक, भोजन, दक्षिणा/उपहार
- भोजन में पूरी, काले चने, हलवा आदि पारम्परिक व्यंजन शामिल
यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य परम्पराओं पर आधारित है; GBNEWS India इसकी पुष्टि नहीं करता।




टिप्पणियाँ
0