सीजेपी के प्रवक्ता सौरव दास और आशुतोष रांका को लिखित माफीनामा और बॉन्ड पर जमानत मिली
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सीजेपी प्रवक्ता सौरव दास और आशुतोष रांका को आज न्यायिक हिरासत से रिहा किया गया। दोनों नेताओं को लिखित माफीनामा, शपथ पत्र और कुल ₹50,000 के व्यक्तिगत तथा जमानती बॉन्ड जमा करने के बाद जमानत पर छोड़ दिया गया। यह निर्णय एसईएम (सेक्योरिटी एंड एन्फोर्समेंट मैनेजमेंट) कोर्ट ने दिया।
जमानत की शर्तें
दोनों कार्यकर्ताओं ने लिखित आश्वासन दिया कि वे शांति भंग नहीं करेंगे, जन शांति और कानून व्यवस्था के प्रति प्रतिबद्ध रहेंगे और जंतर-मंतर के अधिसूचना मुक्त होने तक किसी भी प्रकार का विरोध प्रदर्शन नहीं करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि सभी विरोध प्रदर्शन संविधान की सीमाओं के भीतर ही किए जाएंगे।
कोर्ट का निर्णय
एसईएम कोर्ट ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 135(3) के तहत शांति भंग को रोकने के लिए लिखित वचनपत्रों को पर्याप्त उपाय माना। दिल्ली पुलिस ने हिरासत को तीन दिन और बढ़ाने की मांग की थी, परन्तु कोर्ट ने यह तर्क दिया कि लिखित आश्वासन शांति भंग की आशंकाओं को कम करने के लिए पर्याप्त हैं।
मुख्य बातें
- सौरव दास और आशुतोष रांका को लिखित माफीनामा और शपथ पत्र के बाद जमानत मिली।
- कुल ₹50,000 का व्यक्तिगत और जमानती बॉन्ड जमा किया गया।
- शांति भंग न करने, जन शांति बनाए रखने और जंतर-मंत्र के मुद्दे पर कानून के अनुसार कार्य करने का आश्वासन दिया गया।
- एसईएम कोर्ट ने बीएनएसएस धारा 135(3) के तहत लिखित वचनपत्र को पर्याप्त उपाय माना।
पृष्ठभूमि
सौरव दास और आशुतोष रांका को जंतर-मंत्र अतिक्रमण मामले में हिरासत में रखा गया था। इस दौरान दिल्ली पुलिस ने उनके खिलाफ शांति भंग की आशंका जताते हुए हिरासत को बढ़ाने की मांग की थी। कोर्ट ने अंततः लिखित आश्वासन और बॉन्ड के आधार पर रिहाई का आदेश दिया।
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भविष्य की संभावनाएँ
जमानत शर्तों के तहत दोनों नेताओं को अब सार्वजनिक रूप से शांति भंग या अवैध प्रदर्शन करने से रोकने की जिम्मेदारी है। यदि शर्तों का उल्लंघन किया जाता है तो कोर्ट द्वारा पुनः हिरासत या अन्य कानूनी कार्रवाई की संभावना बनी रहती है।




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