अमित शाह का नशे के खिलाफ अभियान: पंजाब में CBI जांच और 2029 तक नशा मुक्त लक्ष्य
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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को पंजाब के लुधियाना में चिट्टा (सिंथेटिक नशा) का दहन कर नशे के खिलाफ अपना अभियान शुरू किया। उन्होंने कहा कि पंजाब के गांवों में नशीले पदार्थों का कारोबार बड़े पैमाने पर फैला हुआ है और इसे रोकने के लिए सरकार अब CBI जांच के माध्यम से दोषियों को जेल भेजेगी। इस अवसर पर उन्होंने 31 दिसंबर 2029 तक पंजाब को नशा मुक्त करने का लक्ष्य भी घोषित किया।
पंजाब में नशे की वर्तमान स्थिति
विभिन्न खुफिया रिपोर्ट और सुरक्षा एजेंसियों के अनुमानों के अनुसार, पंजाब में हर वर्ष लगभग 8,000 करोड़ रुपये तक का अवैध ड्रग्स कारोबार होता है। राज्य में अनुमानित 30 लाख लोग किसी न किसी रूप में नशीले पदार्थों की लत से जूझ रहे हैं। यह समस्या न केवल स्वास्थ्य को प्रभावित करती है, बल्कि सामाजिक और आर्थिक ताने-बाने को भी कमजोर करती है।
अमित शाह के प्रमुख संदेश
- पंजाब के गांव‑गांव में नशे का कारोबार जारी है।
- सरकार अब CBI जांच से दोषियों को जेल भेजेगी।
- नशे का कारोबार बेलगाम है, इसे रोकने के लिए कड़ी कार्रवाई होगी।li>
- पंजाब की स्थिति ने राष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है।li>
- वर्तमान सरकार में युवा नशे की लत बढ़ी है, इसे रोकना आवश्यक है।li>
- मुख्यमंत्री भगवंत मान से नशा मुक्त पंजाब नहीं बन पाएगा, यह सरकार की विफलता है।li>
- पूरे देश को नशा मुक्त बनाने का संकल्प दोहराया गया।li>
पीड़ित परिवारों से मुलाकात
अमित शाह ने गुरदासपुर, संगरूर और मानसा में एंटी‑ड्रग एक्टिविस्टों के परिवारों से मुलाकात की। प्रमुख मुलाकातें इस प्रकार थीं:
- परविंदर सिंह झोटा (मानसा): झोटा के पिता भीम सिंह ने बताया कि अमित शाह ने उन्हें एक‑दो दिन में न्याय मिलने का भरोसा दिया।
- बिक्रमजीत सिंह (गुरदासपुर): उनकी मां सुरजीत कौर के पैर छूकर आश्वासन दिया गया कि CBI जांच के बाद दोषियों को सजा मिलेगी।
- गुलजार सिंह (संगरूर): आत्महत्या के बाद परिवार ने न्याय की मांग की, जिसे अमित शाह ने सुनकर तुरंत CBI जांच का आदेश दिया।
CBI जांच का आदेश और भविष्य की योजना
अमित शाह ने कहा कि पंजाब में नशे के मामलों को राज्य सरकार से पहले ही केंद्र सरकार ने CBI को सौंप दिया है। उन्होंने मुख्यमंत्री भगवंत मान से अपील की कि बचे हुए दो मामलों को भी CBI को सौंप दिया जाए। साथ ही, उन्होंने 31 दिसंबर 2029 तक नशा मुक्त पंजाब का लक्ष्य निर्धारित किया, जिससे सभी प्रकार के नशीले पदार्थों का उत्पादन, तस्करी और उपभोग समाप्त हो जाएगा।
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नशा तस्करी के स्रोत और रोकथाम के कदम
शाह ने बताया कि नशे के अधिकांश पैकेट गुजरात और महाराष्ट्र के बंदरगाहों से आते हैं। उन्होंने कहा कि अब तक 20,000 करोड़ रुपये मूल्य के नशे को जब्त किया गया है, लेकिन तस्करी के नेटवर्क को पूरी तरह तोड़ना अभी बाकी है। केंद्र सरकार ने इस दिशा में सीमा सुरक्षा, समुद्री निगरानी और राज्य‑स्तरीय पुलिस के साथ समन्वय को मजबूत किया है।
मुख्य बातें
- पंजाब में नशे का कारोबार सालाना 8,000 करोड़ रुपये तक पहुँचता है।
- लगभग 30 लाख लोग नशे की लत से ग्रस्त हैं।
- अमित शाह ने CBI जांच के माध्यम से दोषियों को जेल भेजने का वादा किया।
- 31 दिसंबर 2029 तक नशा मुक्त पंजाब का लक्ष्य घोषित किया गया।
- गुजरात‑महाराष्ट्र के बंदरगाहों से 20,000 करोड़ रुपये मूल्य के नशे की जब्ती की गई।
- पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने के लिए सीबीआई को रिपोर्ट मांगी गई।
निष्कर्ष
अमित शाह का नशे के खिलाफ अभियान पंजाब में ड्रग तस्करी को जड़ से खत्म करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। CBI जांच, कड़ी सजा और 2029 तक नशा मुक्त लक्ष्य के साथ सरकार ने स्पष्ट संकेत दिया है कि नशे के व्यापारियों को अब कोई छूट नहीं मिलेगी। हालांकि, इस योजना की सफलता के लिए राज्य‑केंद्र सहयोग, प्रभावी निगरानी और सामाजिक जागरूकता आवश्यक होगी।




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