सौरभ राजपूत हत्याकांड में मुस्कान‑रस्तोगी और साहिल शुक्ला को फांसी की सजा: अदालत में पेश प्रमुख सबूत
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मेरठ में 3 मार्च 2025 को हुई सौरभ राजपूत की हत्या के बाद, कोर्ट ने 30 सितंबर 2026 को मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला को दोषी करार दिया और 14 अक्टूबर 2026 को दोनों को फांसी की सजा सुनाई। इस निर्णय के पीछे अदालत में पेश किए गए विस्तृत फिजिकल, डिजिटल और गवाह‑आधारित सबूतों का बड़ा योगदान रहा।
मुख्य सबूतों की रूपरेखा
सरकारी पक्ष ने कुल 22 गवाहों के बयान, 126 सुनवाईयों में प्रस्तुत साक्ष्य और कई फिजिकल एवं डिजिटल एविडेंस को मिलाकर केस का ढांचा तैयार किया। प्रमुख सबूत इस प्रकार हैं:
- हथियारों की बरामदगी: हत्या में इस्तेमाल किए गए चाकू और उस्तरा पुलिस ने मुस्कान और साहिल की निशानदेही से बरामद किए।
- डिजिटल रिकॉर्ड: मुस्कान‑साहिल की कॉल डिटेल, सोशल मीडिया चैट, सौरभ की माँ रेनू और दोस्त संजीव पाल के फोन रिकॉर्ड कोर्ट में पेश हुए। इन रिकॉर्डों ने घटना के समय और संपर्क की कड़ियों को स्पष्ट किया।
- होटल सीसीटीवी और मैनेजर का बयान: हत्या के बाद दोनों ने शिमला‑मनाली की यात्रा की, जहाँ उनके ठहरने वाले होटलों के सीसीटीवी फुटेज और मैनेजर के बयान ने उनके मार्ग को सिद्ध किया।
- चश्मदीद गवाह का बयान: हत्या की रात सौरभ के घर जाते हुए साहिल को देखे चश्मदीद गवाह का बयान सरकारी पक्ष के लिए निर्णायक रहा।
- शरीर के टुकड़े और नीला ड्रम: घटनास्थल से मिली मानव रक्त और शव के पाँच टुकड़े, जिन्हें नीले ड्रम में सीमेंट से ढक कर छिपाने की कोशिश की गई थी, फिजिकल एविडेंस के रूप में प्रस्तुत हुए।
ट्रायल की प्रक्रिया
हत्याकांड का खुलासा 18 मार्च 2025 को हुआ, जब सौरभ के छोटे भाई राहुल ने घर में दुर्गंध महसूस की और पुलिस ने ड्रम से शव के टुकड़े बरामद किए। इसके बाद केस में 13 महीने तक चलने वाले ट्रायल में 22 गवाहों की गवाही, 126 सुनवाईयों में सबूतों की प्रस्तुति और कई बार पुनः‑परीक्षण हुए। अंततः जिला एवं सत्र न्यायाधीश अरविंद कुमार मिश्रा ने दोनों को फांसी की सजा सुनाई।
मुख्य बातें
- हत्याकांड की तारीख: 3 मार्च 2025
- फांसी की सजा सुनाई: 14 अक्टूबर 2026
- पेश किए गए गवाह: 22
- सुनवाई की संख्या: 126
- बरामद किए गए हथियार: चाकू, उस्तरा
- डिजिटल एविडेंस: कॉल रिकॉर्ड, सोशल मीडिया चैट, होटल सीसीटीवी
- शरीर के टुकड़े नीले ड्रम में छिपाए गए
इन सबूतों के आधार पर न्यायालय ने मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को सौरभ राजपूत की हत्या, शव को छिपाने और सबूत मिटाने के गंभीर आरोपों में दोषी ठहराया। यह केस फोरेंसिक, डिजिटल फॉरेंसिक और गवाह‑आधारित साक्ष्य के समन्वित उपयोग का एक प्रमुख उदाहरण बन गया है।




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