सऊदी में मक्का डिफेंस पैक्ट सक्रिय, पाकिस्तान‑तुर्की के सैनिकों की तैनाती की तैयारी
3 मिनट में पढ़ें

सऊदी अरब पर यमन के हूती विद्रोहियों के लगातार हमलों के बीच रियाद में एक उच्च‑स्तरीय बैठक हुई, जहाँ मक्का डिफेंस पैक्ट को आधिकारिक तौर पर सक्रिय किया गया। इस कदम से पाकिस्तान और तुर्की के सैनिकों को सऊदी में तैनात करने की तैयारी स्पष्ट हुई, जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा ढाँचा मजबूत होगा।
मक्का डिफेंस पैक्ट का सक्रियण
सऊदी के रक्षा मंत्री प्रिंस खालिद बिन सलमान अल‑सऊद ने अपने ट्विटर पोस्ट में बताया कि स्ट्रैटेजिक पॉलिटिकल एंड डिफेंस कमेटी (एसपीडीसी) की इमरजेंसी मीटिंग में पवित्र स्थलों पर हुए हमलों के जवाब में सामूहिक रोकथाम (collective deterrence) उपायों को लागू करने पर सहमति बनी। उन्होंने कहा, “हमारी एकजुटता और एकता को फिर से दोहराया गया है।”
त्रिपक्षीय रक्षा समझौता और उसकी शर्तें
अगस्त 2026 में पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के बीच एक त्रिपक्षीय रक्षा समझौता हुआ था, जिसमें यह तय किया गया था कि यदि समझौते के किसी भी सदस्य पर हमला होता है, तो वह सभी तीन देशों पर हमला माना जाएगा। इस समझौते के तहत मक्का डिफेंस पैक्ट का ढांचा तैयार किया गया था, और आज के सक्रियण से वह ढांचा लागू हो रहा है।
बैठक में शामिल प्रमुख प्रतिनिधि
- पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री इसहाक डार
- पाकिस्तान के रक्षा बलों के प्रमुख, फील्ड मार्शल आसिम मुनीर
- पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ
- सऊदी के रक्षा मंत्री प्रिंस खालिद बिन सलमान अल‑सऊद
- तुर्की के प्रतिनिधि (नाम स्रोत में नहीं दिया गया)
हूती हमलों के कारण तनाव में वृद्धि
हूती विद्रोहियों ने हाल ही में सऊदी के पवित्र स्थलों और रणनीतिक बिंदुओं पर कई हमले किए हैं, जिससे सुरक्षा स्थिति बिगड़ी है। इन हमलों को रोकने और भविष्य में संभावित खतरों से बचाव के लिए सामूहिक रक्षा उपायों की आवश्यकता महसूस की गई।
आपके लिए संबंधित खबरें
मुख्य बातें
- मक्का डिफेंस पैक्ट को रियाद में हुई इमरजेंसी मीटिंग के बाद सक्रिय किया गया।
- पाकिस्तान और तुर्की के सैनिक सऊदी में तैनात किए जाएंगे।
- त्रिपक्षीय रक्षा समझौते की शर्तें फिर से लागू होंगी, जिससे किसी भी सदस्य पर हमला सभी पर माना जाएगा।
- एसपीडीसी ने सामूहिक रोकथाम उपायों (collective deterrence measures) को लागू करने पर सहमति जताई।
- बैठक में पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री, रक्षा बलों के प्रमुख और रक्षा मंत्री सहित कई उच्च‑स्तरीय अधिकारी शामिल हुए।
भविष्य की संभावनाएँ
सऊदी ने इस कदम को क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता के रूप में प्रस्तुत किया है। पाकिस्तान की भागीदारी को “क्षेत्रीय शांति व स्थिरता में योगदान” के रूप में सराहा गया है। तुर्की की भूमिका और सैनिक तैनाती के विस्तृत विवरण अभी स्पष्ट नहीं हुए हैं, लेकिन यह स्पष्ट है कि तीनों देशों के बीच रक्षा सहयोग का स्तर अब पहले से अधिक गहरा हो गया है।




टिप्पणियाँ
0