सारा अली खान ने नेपोटिज्म पर की खुली बात: कोई गॉडफादर नहीं, खुद ही संघर्ष
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बॉलीवुड की युवा अभिनेत्री सारा अली खान ने हाल ही में नेपोटिज्म पर अपने विचार रखे, यह बताते हुए कि इंडस्ट्री में उनका कोई गॉडफादर नहीं था। नई फिल्म ‘उड़ता तीर’ (23 अक्टूबर को रिलीज) के प्रचार के बीच उन्होंने इस मुद्दे को उठाया।
नेपोटिज्म पर सारा की राय
सारा ने कहा कि फिल्म इंडस्ट्री में नेपोटिज्म का असर स्पष्ट है – डेब्यू आसान हो जाता है, परंतु डेब्यू के 8 साल बाद भी उन्हें अपने आप को साबित करना पड़ता है। उन्होंने कहा, “नेपोटिज्म अब लोगों के लिए एक बुरा शब्द बन गया है। इससे किसी की मेहनत को नजरअंदाज कर दिया जाता है।”
परिवार की भूमिका
सारा ने बताया कि उनके पिता सैफ अली खान और माँ अमृता सिंह के तलाक के बाद वह सिंगल मदर के साथ पली-बढ़ीं। पिता ने कभी उनके लिए किसी प्रोजेक्ट की सिफ़ारिश नहीं की, न ही कोई गॉडफादर की तरह मदद की। उन्होंने कहा, “जब मुझे ‘केदारनाथ’ को लेकर परेशानी हुई, तो मैंने उसे खुद सुलझाया था। मेरे साथ कोई नहीं था।”
अन्य सितारों का उल्लेख
साक्षात्कार में सारा ने जान्हवी कपूर और अनन्या पांडे का भी जिक्र किया, यह दर्शाते हुए कि नेपोटिज्म का मुद्दा केवल उनके तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा, “चाहे जान्हवी हों, अनन्या हों या मैं, हमने ये नहीं चुना कि हमें किसके घर में पैदा होना है। हम बस किस्मत वाले थे।”
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मुख्य बातें
- सारा अली खान ने नेपोटिज्म को ‘बुरा शब्द’ कहा और कहा कि यह मेहनत को अनदेखा करता है।
- उनके पिता ने कभी उनके लिए सिफ़ारिश नहीं की; कोई गॉडफादर नहीं था।
- डिब्यू के 8 साल बाद भी उन्हें अपने करियर को साबित करना पड़ता है।
- जाने-माने सितारों जैसे जान्हवी कपूर और अनन्या पांडे का भी नेपोटिज्म से जुड़ा अनुभव है।
- सारा ने कहा कि उन्हें मौके मिले और पहचान मिली, पर उम्मीदों का स्तर बहुत ऊँचा हो गया है।
सारा अली खान ने यह भी कहा कि उन्होंने अपने करियर में कई चुनौतियों को खुद ही हल किया और अब भी उन्हें अपने काम को लेकर लोगों को समझाना पड़ता है, जो उनके लिए उचित नहीं है। उनका संदेश यह है कि नेपोटिज्म के कारण मिलने वाले लाभों को स्वीकार करते हुए भी, व्यक्तिगत मेहनत और संघर्ष को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।




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