सपा सांसद शिवपाल का बड़ा दावा: बिना गठबंधन कांग्रेस 2024 में एक भी सीट नहीं जीत पाती
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उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ से सपा सांसद शिवपाल सिंह पटेल ने 2024 लोकसभा चुनाव को लेकर एक चौंकाने वाला बयान दिया। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी के बिना गठबंधन के कांग्रेस एक भी सीट नहीं जीत पाती और राहुल गांधी भी अपनी पारंपरिक रायबरेली सीट छोड़ने को तैयार थे। यह बयान उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के करीब आने पर आया, जब विभिन्न पार्टियों के नेताओं के बयान सामने आ रहे हैं।
मुख्य बातें
- शिवपाल सिंह पटेल का दावा: बिना सपा गठबंधन के कांग्रेस 2024 में एक भी सीट नहीं जीत पाती।
- राहुल गांधी ने एक समय अपनी रायबरेली सीट छोड़ने को तैयार थे, लेकिन सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के भरोसे से उन्होंने चुनाव लड़ने का फैसला किया।
- सपा ने कांग्रेस को पूरी तरह समर्थन दिया; जहाँ कांग्रेस को सीटें मिलीं, वहाँ सपा के सभी वोट कांग्रेस को ही मिले।
- सपा के पास लगभग 125 विधायक हैं, जबकि कांग्रेस के केवल दो हैं; इस अनुपात के आधार पर सपा ने कांग्रेस को 10‑25 सीटें देने का सुझाव दिया।
- सपा ने 2024 में कुल 37 लोकसभा सीटें जीतीं, जबकि कांग्रेस ने 6 सीटें हासिल कीं।
शिवपाल सिंह पटेल का विस्तृत बयान
शिवपाल ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा, “अगर समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन नहीं होता, तो कांग्रेस एक भी सीट नहीं जीत पाती।” उन्होंने आगे बताया कि राहुल गांधी ने पहले अपनी रायबरेली सीट छोड़ने को तैयार थे, क्योंकि वे अमेठी जैसी पारंपरिक नेहरू परिवार की सीट से चुनाव लड़ने में हिचकिचा रहे थे। सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने उन्हें भरोसा दिलाया और चेतावनी दी कि अगर वे नहीं लड़े तो अखिलेश यादव अपना उम्मीदवार उतार देंगे। इस दबाव के बाद ही राहुल गांधी ने रायबरेली से चुनाव लड़ने का फैसला किया।
गठबंधन का प्रभाव
शिवपाल ने कहा कि जहाँ भी कांग्रेस को सीटें मिलीं, सपा के सभी वोट कांग्रेस को ही मिले। इस सहयोग के कारण कांग्रेस ने छह सीटें जीतीं, जबकि सपा ने 37 सीटें हासिल कीं। उन्होंने कहा, “हम चाहते हैं कि कांग्रेस अपनी शक्ति के आधार पर सहयोग करे, क्योंकि हमारे पास 125 विधायक हैं और उनका केवल दो हैं। इस अनुपात से कांग्रेस को 10‑25 सीटें मिलनी चाहिए, न कि 50 से अधिक।”
भविष्य की राजनीति पर असर
यह बयान उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनावों के संदर्भ में महत्वपूर्ण है। सपा का दावा है कि उनका समर्थन कांग्रेस के लिए निर्णायक रहा है और भविष्य में भी गठबंधन के बिना कांग्रेस की जीत की संभावना कम है। यह बात दोनों पार्टियों के बीच रणनीतिक समझौते को उजागर करती है, जहाँ सपा अपने बड़े विधायक आधार को leverage करके कांग्रेस को अधिक सीटें दिलाने की कोशिश कर रहा है।




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