Skip to content
Monday, 05 October 2026|India
05 Octआज की खबरें
LIVE TV
🔴 ब्रेकिंग न्यूज़
मुंबई में ठाकरे बंधुओं का गर्जना मोर्चा: मतदाता सूची से हटाए गए करोड़ों नामों पर उठे सवाल•होरमुज संकट के बीच भारत का ऊर्जा सुरक्षा प्लान: UAE से अंडरसी तेल पाइपलाइन की तैयारी•फ्लाईदुबई FZ1073 में को‑पायलट द्वारा कैप्टन पर हमला: 180 यात्रियों की जान बची•लखनऊ में गोमती की बाढ़ से फैजुल्लागंज फिर डूबा, 10,000 लोग पलायन कर चुके•उद्धव‑राज ठाकरे ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग पर गर्जना रैली का आयोजन•स्वतंत्रता सेनानी एक्सप्रेस के A2 कोच में सांप: यात्रियों में दहशत, कोच बदला•दिल्ली में डिजिटल अरेस्ट गैंग का पर्दाफाश, कंबोडिया से जुड़ा कनेक्शन, JK‑राजस्थान से दो आरोपी अरेस्ट•मुंबई में ठाकरे बंधुओं का गर्जना मोर्चा, असदुद्दीन ओवैसी की श्रावस्ती में जनसभामुंबई में ठाकरे बंधुओं का गर्जना मोर्चा: मतदाता सूची से हटाए गए करोड़ों नामों पर उठे सवाल•होरमुज संकट के बीच भारत का ऊर्जा सुरक्षा प्लान: UAE से अंडरसी तेल पाइपलाइन की तैयारी•फ्लाईदुबई FZ1073 में को‑पायलट द्वारा कैप्टन पर हमला: 180 यात्रियों की जान बची•लखनऊ में गोमती की बाढ़ से फैजुल्लागंज फिर डूबा, 10,000 लोग पलायन कर चुके•उद्धव‑राज ठाकरे ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग पर गर्जना रैली का आयोजन•स्वतंत्रता सेनानी एक्सप्रेस के A2 कोच में सांप: यात्रियों में दहशत, कोच बदला•दिल्ली में डिजिटल अरेस्ट गैंग का पर्दाफाश, कंबोडिया से जुड़ा कनेक्शन, JK‑राजस्थान से दो आरोपी अरेस्ट•मुंबई में ठाकरे बंधुओं का गर्जना मोर्चा, असदुद्दीन ओवैसी की श्रावस्ती में जनसभा
विज्ञापन
Home » रूसी तेल पर विदेश मंत्री एस. जयशंकर का बड़ा ऐलान: भारत की ऊर्जा नीति में नया मोड़
News

रूसी तेल पर विदेश मंत्री एस. जयशंकर का बड़ा ऐलान: भारत की ऊर्जा नीति में नया मोड़

3 मिनट में पढ़ें

By Kishan kumar Jain• प्रकाशित 04 Oct 2026• अपडेट 04 Oct 2026• 1 views
रूसी तेल पर विदेश मंत्री एस. जयशंकर का बड़ा ऐलान: भारत की ऊर्जा नीति में नया मोड़
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने रूस से कच्चे तेल की आयात नीति पर स्पष्ट बयान दिया, जिसमें अमेरिकी टैरिफ प्रस्ताव के बावजूद भारत-रूस ऊर्जा संबंधों को जारी रखने की प्रतिबद्धता जताई गई।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने हाल ही में एक परामर्श समिति की बैठक में रूस से कच्चे तेल की आयात नीति पर अपना स्पष्ट रुख पेश किया। अमेरिकी टैरिफ प्रस्ताव और अंतरराष्ट्रीय दबाव के बावजूद भारत ने रूसी तेल के साथ अपने संबंधों को बनाए रखने की दृढ़ता दिखाई। यह बयान भारत की ऊर्जा सुरक्षा और कूटनीतिक रणनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ दर्शाता है।

रूसी तेल पर भारत की बढ़ती निर्भरता

यूक्रेन युद्ध के बाद से भारत की ऊर्जा मिश्रण में रूसी तेल का हिस्सा उल्लेखनीय रूप से बढ़ा है। पहले जहाँ रूसी तेल का भारतीय बास्केट में हिस्सा 2% से भी कम था, अब वह लगभग 50% तक पहुँच गया है। विदेश मंत्रालय की सलाहकार समिति की बैठक में बताया गया कि भारत का लगभग 52% कच्चा तेल आयात रूस से हो रहा है। यह वृद्धि पश्चिम एशिया के पारंपरिक सप्लायर्स पर युद्ध के प्रभाव और भारत की ऊर्जा सुरक्षा को सुनिश्चित करने की आवश्यकता से प्रेरित है।

अमेरिकी टैरिफ प्रस्ताव पर भारत की प्रतिक्रिया

संयुक्त राज्य अमेरिका ने रूसी तेल आयात करने वाले देशों पर 100% टैरिफ लगाने का प्रस्ताव रखा है। इस प्रस्ताव पर भारत ने स्पष्ट रूप से कहा कि यह कदम भारत की ऊर्जा जरूरतों या मौजूदा व्यापारिक संबंधों को प्रभावित नहीं करेगा। विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि भारत अपने ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने और कूटनीति के माध्यम से समाधान खोजने पर केंद्रित रहेगा।

परामर्श समिति की बैठक के मुख्य बिंदु

  • रूस के साथ बहुआयामी जुड़ाव – व्यापार, निवेश, ऊर्जा, कनेक्टिविटी, संस्कृति और लोगों के बीच संबंध।
  • यूक्रेन संघर्ष को समाप्त करने के लिए बातचीत और कूटनीति का समर्थन।
  • रूसी तेल आयात पर अमेरिकी टैरिफ प्रस्ताव की संभावित प्रभाव पर चर्चा।
  • भारत-रूस ऊर्जा संबंधों को जारी रखने की प्रतिबद्धता।

बैठक में उपस्थित प्रमुख सांसद

बैठक में विभिन्न दलों के सांसद शामिल हुए, जिनमें कांग्रेस के मनीष तिवारी, मुकुल वासनिक, गुरजीत औजला; बीजेपी के विनोद तावड़े, विक्रमजीत साहनी, के. सुधाकर; AITC के बाबुल सुप्रियो और CPM के पी. संतोष कुमार शामिल थे। उन्होंने भारत-रूस व्यापार और ऊर्जा संबंधों पर अमेरिकी टैरिफ प्रस्ताव के संभावित असर पर सवाल उठाए।

आपके लिए संबंधित खबरें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का समर्थन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और यूक्रेनी नेतृत्व दोनों से संवाद किया है, जिससे भारत की कूटनीतिक पहल को बल मिला है। यह संकेत देता है कि भारत अंतरराष्ट्रीय मंच पर संतुलित भूमिका निभाते हुए अपनी ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता दे रहा है।

मुख्य बातें

  • भारत का रूसी कच्चे तेल आयात लगभग 50% तक बढ़ा है।
  • अमेरिकी 100% टैरिफ प्रस्ताव के बावजूद भारत रूसी तेल आयात जारी रखेगा।
  • विदेश मंत्री जयशंकर ने भारत-रूस बहुआयामी जुड़ाव को रेखांकित किया।
  • बैठक में विभिन्न दलों के सांसदों ने टैरिफ प्रस्ताव पर चिंताएँ व्यक्त कीं।
  • प्रधानमंत्री मोदी ने दोनों पक्षों से संवाद किया, कूटनीति को समर्थन दिया।

रूसी तेल पर भारत की नीति इस बात को स्पष्ट करती है कि ऊर्जा सुरक्षा, कूटनीति और आर्थिक हितों को संतुलित करने के लिए भारत अंतरराष्ट्रीय दबाव के बावजूद अपने रणनीतिक साझेदारियों को बनाए रखेगा। यह दिशा भविष्य में भारत की ऊर्जा रणनीति और वैश्विक ऊर्जा बाजार में उसकी भूमिका को निर्धारित करेगी।

यह खबर शेयर करें: WhatsApp Facebook X Telegram
💬 0 टिप्पणियाँ

टिप्पणियाँ

0

अपनी टिप्पणी लिखें

Your email address will not be published. Required fields are marked *

⌂होम🔥ब्रेकिंग▣लेटेस्ट▶वीडियो⌕खोजें