अक्टूबर 2026 का पंचक: 4 दिन 12 घंटे, इन कार्यों से बचें
2 मिनट में पढ़ें

अक्टूबर 2026 में पंचक 21 अक्टूबर बुधवार को सुबह 06:59 बजे शुरू होकर 25 अक्टूबर रविवार को शाम 07:21 बजे समाप्त होगा। कुल अवधि 4 दिन 12 घंटे की होगी। यह पंचक शास्त्रों के अनुसार दोषरहित (सौम्य) माना गया है, परन्तु इस दौरान कुछ कार्यों को पूरी तरह वर्जित बताया गया है।
पंचक की तिथि व समय
आरंभ: 21 अक्टूबर 2026, बुधवार – 06:59 बजे समापन: 25 अक्टूबर 2026, रविवार – 19:21 बजे कुल अवधि: 4 दिन 12 घंटे
पंचक में वर्जित कार्य
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, पंचक के दौरान निम्नलिखित कार्यों को करने से अनिष्ट हो सकता है। इन्हें भूलकर भी नहीं करना चाहिए:
- दक्षिण दिशा में यात्रा: दक्षिण को यम की दिशा माना जाता है; इस दिशा में यात्रा करने से दुर्घटना या कष्ट का खतरा बढ़ता है।
- लकड़ी या ईंधन का संग्रह: पंचक में लकड़ी, घास या किसी भी ज्वलनशील ईंधन को घर में इकट्ठा न करें, क्योंकि इससे अग्नि‑भय उत्पन्न हो सकता है।
- नई चारपाई या पलंग बनवाना: इस अवधि में नई खाट, पलंग या लकड़ी के फर्नीचर का निर्माण व खरीदना अशुभ माना जाता है।
- घर की छत डलवाना: नया या पुराना मकान हो, पंचक में छत नहीं डलवानी चाहिए; मान्यता है कि इससे आर्थिक तंगी और घर में कलह हो सकती है।
- मांगलिक कार्य: विवाह, सगाई, गृह प्रवेश, मुंडन, नए वस्त्र‑आभूषण खरीदना आदि सभी शुभ कार्य इस दौरान टालें।
- अंतिम संस्कार से जुड़े नियम: यदि पंचक के दौरान मृत्यु हो, तो सामान्य अंतिम संस्कार नहीं किया जाता। पंडित की सलाह पर आटे या कुश के पाँच प्रतीकात्मक पुतले बनाकर विशेष शांति‑विधान और दाह संस्कार किया जाता है।
क्या किया जा सकता है?
पंचक में पूजा‑पाठ, मंत्र जाप और अन्य धार्मिक अनुष्ठान करने पर कोई पाबंदी नहीं है। सामान्य दैनिक कार्य, व्यापार‑कार्य और यात्रा (यदि दक्षिण दिशा में नहीं) किए जा सकते हैं।
आपके लिए संबंधित खबरें
मुख्य बातें
- पंचक 21 अक्टूबर से 25 अक्टूबर 2026 तक रहेगा।
- यह दोषरहित (सौम्य) पंचक है, परन्तु कुछ कार्य वर्जित हैं।
- दक्षिण दिशा में यात्रा, लकड़ी‑ईंधन संग्रह, नई चारपाई/पलंग बनवाना, छत डलवाना और सभी मांगलिक कार्य टालें।
- पूजा‑पाठ और मंत्र जाप करने में कोई प्रतिबंध नहीं।
यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य ज्ञान पर आधारित है; टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता।




टिप्पणियाँ
0