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अक्टूबर 2026 की मासिक शिवरात्रि: 8 अक्टूबर को रखी जाएगी व्रत विधि और महत्व

3 मिनट में पढ़ें

By Kishan kumar Jain• प्रकाशित 05 Oct 2026• अपडेट 05 Oct 2026• 1 views
अक्टूबर 2026 की मासिक शिवरात्रि: 8 अक्टूबर को रखी जाएगी व्रत विधि और महत्व
अक्टूबर 2026 में मासिक शिवरात्रि का व्रत 8 अक्टूबर (गुरुवार) को रखा जाएगा। इस लेख में तिथि, पूजा विधि, रात्रि पूजा का महत्व और व्रत से जुड़े मान्य लाभों की पूरी जानकारी…

हिंदू कैलेंडर के अनुसार हर महीने की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को भगवान शिव की विशेष आराधना के लिये मासिक शिवरात्रि मनाई जाती है। अक्टूबर 2026 में यह पावन दिन 8 अक्टूबर (गुरुवार) को आएगा, जब कई श्रद्धालु व्रत रखेंगे और शिवलिंग या शिव की तस्वीर के सामने विशेष पूजा करेंगे।

अक्टूबर 2026 में मासिक शिवरात्रि की तिथि

पंचांग के अनुसार, अक्टूबर महीने में कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि का आरम्भ 8 अक्टूबर 2026 को रात 10:15 बजे से होगा और यह 9 अक्टूबर 2026 को रात 9:35 बजे समाप्त होगी। चतुर्दशी तिथि का रात में होना ही मासिक शिवरात्रि के व्रत का मुख्य मानदंड माना जाता है, इसलिए इस वर्ष का व्रत 8 अक्टूबर, गुरुवार को रखा गया है।

व्रत का महत्व और मान्यताएँ

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो भक्त श्रद्धापूर्वक मासिक शिवरात्रि का उपवास रखते हैं, उनके जीवन से बड़े से बड़े संकट टल जाते हैं। शिवरात्रि के दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने से मानसिक शांति, मनोकामनाओं की पूर्ति और जीवन में आने वाली परेशानियों से राहत मिलती है। विशेष रूप से विवाहित महिलाएँ परिवार की सुख‑शांति और पति की लंबी आयु की कामना से व्रत रखती हैं, जबकि अविवाहित लोग अच्छे जीवनसाथी की इच्छा से इस व्रत को अपनाते हैं।

पूजा विधि – सुबह से शाम तक

मासिक शिवरात्रि के दिन पूजा का क्रम इस प्रकार है:

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  • स्नान और संकल्प: सुबह स्नान कर व्रत का संकल्प लिया जाता है।
  • शिवलिंग का अभिषेक: जल, गंगाजल, दूध, दही, शहद आदि से शिवलिंग या शिव की तस्वीर का अभिषेक किया जाता है।
  • अर्पण सामग्री: बेलपत्र, धतूरा, फूल, फल और अन्य प्रसाद अर्पित किए जाते हैं।
  • मंत्र जाप: ओम् नमः शिवाय या अन्य शिव मंत्र का निरंतर जाप किया जाता है।
  • रात्रि जागरण: चार प्रहर (रात के चार भाग) तक जागरण कर शिव के ध्यान, मंत्र जाप और कथा‑सुनना जारी रहता है।
  • मंदिर यात्रा: यदि संभव हो तो रात में निकटतम शिव मंदिर जाकर दर्शन और विशेष पूजा की जाती है।

रात्रि पूजा का विशेष महत्व

शिवरात्रि में रात्रि पूजा को अत्यधिक महत्व दिया जाता है। माना जाता है कि रात के समय भगवान शिव की आराधना करने से आध्यात्मिक लाभ अधिक मिलता है। इस कारण कई भक्त रात में चार प्रहर तक जागरण कर शिव के जलाभिषेक, बेलपत्र अर्पण और मंत्र जाप करते हैं।

मुख्य बातें

  • मासिक शिवरात्रि का व्रत 8 अक्टूबर 2026 (गुरुवार) को रखा जाएगा।
  • व्रत का समय चतुर्दशी तिथि के रात के भाग में शुरू होता है (10:15 बजे) और अगले दिन रात 9:35 बजे समाप्त होता है।
  • पूजा में जल, गंगाजल, दूध, दही, शहद, बेलपत्र, धतूरा, फूल और फल का अभिषेक शामिल है।
  • ओम् नमः शिवाय मंत्र का निरंतर जाप व्रत के दौरान किया जाता है।
  • रात्रि जागरण (चार प्रहर) के दौरान शिव के ध्यान और कथा‑सुनना किया जाता है।
  • व्रत रखने से मानसिक शांति, संकटों से मुक्ति और मनोकामनाओं की पूर्ति की मान्यता है।

धार्मिक मान्यताओं पर टिप्पणी

यह लेख केवल धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारी पर आधारित है। टीवी9 भारतवर्ष इन तथ्यों की पुष्टि नहीं करता। व्रत रखने वाले भक्तों को व्यक्तिगत स्वास्थ्य और परिस्थितियों को ध्यान में रखकर ही उपवास करना चाहिए।

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