नवरात्रि अष्टमी‑नवमी का संयोग: 19 अक्टूबर को कन्या पूजन, हवन और व्रत पारण का सही समय
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शारदीय नवरात्रि 2026 में 19 अक्टूबर को अष्टमी और नवमी दोनों तिथियों का संयोग बन रहा है, जिससे कई भक्तों को कन्या पूजन, हवन और व्रत पारण के समय को लेकर उलझन हो रही है। पंचांग के अनुसार अष्टमी का समय सुबह 10 बजकर 51 मिनट तक रहेगा, उसके बाद नवमी का समय 20 अक्टूबर दोपहर 12 बजकर 50 मिनट तक रहेगा। इस लेख में हम इस विशेष संयोग के लिए सही मुहूर्त, पूजा‑पाठ और व्रत खोलने के क्रम को स्पष्ट करेंगे।
अष्टमी‑नवमी का संयोग और पंचांग विवरण
पंचांग के अनुसार 2026 में 19 अक्टूबर, सोमवार को अष्टमी तिथि सुबह 10:51 बजे तक रहेगी। इस समय के बाद नवमी तिथि शुरू होगी, जो 20 अक्टूबर, मंगलवार को दोपहर 12:50 बजे तक चलेगी। इस कारण 19 अक्टूबर की सुबह अष्टमी और उसके बाद नवमी दोनों तिथियों में पूजा‑पाठ संभव है। दशहरा (विजयदशमी) 20 अक्टूबर, मंगलवार को मनाया जाएगा।
कन्या पूजन – अष्टमी या नवमी में कब करना चाहिए?
धार्मिक परम्परा के अनुसार, जो भक्त अष्टमी के दिन कन्या पूजन करते हैं, उन्हें अष्टमी तिथि के भीतर ही अनुष्ठान समाप्त करना चाहिए। अर्थात् 19 अक्टूबर को सुबह 10:51 बजे से पहले पूजन पूरा कर लेना चाहिए। वहीं, यदि भक्त नवमी के दिन कन्या पूजन करना चाहते हैं, तो उन्हें नवमी तिथि शुरू होने के बाद, अर्थात् 19 अक्टूबर को 10:51 बजे के बाद ही पूजा करनी चाहिए।
हवन और कन्या पूजन का क्रम
नवरात्रि में हवन और कन्या पूजन दोनों का विशेष महत्व है। परम्परा के अनुसार पहले मां दुर्गा का हवन और पूर्णाहुति किया जाता है, फिर आरती के बाद कन्याओं को सम्मानपूर्वक बैठाकर उनके पैर धोए जाते हैं, तिलक लगाया जाता है और हलवा, पूरी, काले चने आदि का भोजन कराया जाता है। इसके बाद दक्षिणा या उपहार देकर विदा किया जाता है। इन सभी रस्मों के बाद व्रत का पारण किया जाता है।
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व्रत पारण का सही समय
व्रत खोलने से पहले हवन और कन्या पूजन दोनों पूर्ण होना अनिवार्य है। पंचांग के अनुसार व्रत पारण के समय इस प्रकार हैं:
- अष्टमी व्रत पारण: 19 अक्टूबर 2026, सोमवार को सुबह 6:53 बजे या 7:53 बजे के बाद।
- नवमी व्रत पारण: 20 अक्टूबर 2026, मंगलवार को सुबह 9:35 बजे के बाद।
भक्तों को सलाह दी जाती है कि स्थानीय पंचांग के अनुसार अंतिम पुष्टि कर लें और फिर मां दुर्गा को भोग अर्पित करके व्रत खोलें।
मुख्य बातें
- 19 अक्टूबर को अष्टमी और नवमी दोनों तिथियों का संयोग है।
- अष्टमी का समय सुबह 10:51 बजे तक, उसके बाद नवमी शुरू होगी।
- अष्टमी‑कन्या पूजन 10:51 बजे से पहले, नवमी‑कन्या पूजन 10:51 बजे के बाद करना चाहिए।
- हवन पहले, फिर कन्या पूजन, उसके बाद व्रत पारण करना परम्परागत क्रम है।
- अष्टमी व्रत पारण: 19 अक्टूबर सुबह 6:53/7:53 बजे के बाद; नवमी व्रत पारण: 20 अक्टूबर सुबह 9:35 बजे के बाद।
यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य पंचांग डेटा पर आधारित है; टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता।




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