मुंबई में व्यापारियों ने 0.4% यू.पी.आई. एमडीआर के विरोध में ‘नो यू.पी.आई. डे’ मनाया
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मुंबई में 2 अक्टूबर को व्यापारियों ने प्रस्तावित 0.4% मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) के विरोध में “नो यू.पी.आई. डे” का आयोजन किया। यह विरोध प्रदर्शन 15 अक्टूबर 2026 से लागू होने वाले नए शुल्क के खिलाफ है, जिसके तहत ₹2,000 से अधिक के यूपीआई लेनदेन पर 0.4% का शुल्क लगाया जाएगा।
विरोध का मुख्य कारण
फेडरेशन ऑफ रिटेल ट्रेडर्स वेलफेयर एसोसिएशन (एफआरटीडब्ल्यूए) के अध्यक्ष विरेन शाह ने व्यापारियों से यूपीआई भुगतान स्वीकार न करने की अपील की। उनका तर्क है कि डिजिटल इंडिया के लक्ष्य को साकार करने में छोटे-छोटे व्यापारियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, और यह नया शुल्क उनकी भुगतान लागत में सीधे वृद्धि करेगा।
व्यापारियों की मांगें
- प्रस्तावित 0.4% एमडीआर को रद्द या कम करने की मांग।
- भविष्य में डिजिटल भुगतान के लिए कोई अतिरिक्त शुल्क न लगने की गारंटी।
- वर्तमान में लागू यू.पी.आई. शुल्क संरचना को बरकरार रखने की अपील।
मुख्य बातें
- प्रस्तावित 0.4% एमडीआर 15 अक्टूबर 2026 से प्रभावी होगा।
- एमडीआर केवल ₹2,000 से अधिक के लेनदेन पर लागू होगा।
- एफआरटीडब्ल्यूए के अध्यक्ष विरेन शाह ने व्यापारियों को “नो यू.पी.आई. डे” मनाने का आह्वान किया।
- व्यापारी डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने में अपनी भूमिका को रेखांकित कर रहे हैं।
भविष्य की संभावनाएँ
यदि प्रस्तावित एमडीआर लागू हो जाता है, तो छोटे व्यापारियों की लाभप्रदता पर असर पड़ सकता है। इस पर सरकारी और नियामक एजेंसियों की प्रतिक्रिया अभी स्पष्ट नहीं है, लेकिन व्यापारियों ने कहा है कि वे आगे भी डिजिटल भुगतान के विकल्पों को समर्थन देंगे, बशर्ते अतिरिक्त शुल्क न लगाया जाए।




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